
दिनांक 18-04-2026 को अल-इकरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) तथा ‘जीवन’ विशिष्ट शिक्षा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में “समावेशी शिक्षा” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल एवं भव्य आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में समावेशन की अवधारणा को सुदृढ़ करना तथा दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशील, सकारात्मक एवं व्यवहारिक दृष्टिकोण का विकास करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत उद्बोधन एवं परिचय सत्र के साथ हुआ। कार्यक्रम का कुशल संचालन सहायक प्रोफेसर असरफ अली द्वारा किया गया। उन्होंने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसके उद्देश्य, महत्व एवं विभिन्न सत्रों की विस्तृत जानकारी दी। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि समावेशी शिक्षा केवल शैक्षिक अवधारणा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय एवं समान अवसर का आधार है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री अनिल कुमार सिंह (प्राचार्य, ‘जीवन’ विशिष्ट शिक्षा संस्थान, धनबाद) ने अपने प्रेरणादायक वक्तव्य में समावेशी शिक्षा के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी की विशिष्ट क्षमताओं को पहचानकर उनका समुचित विकास करना है। उन्होंने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के साथ कार्य करते समय शिक्षकों में धैर्य, संवेदनशीलता एवं नवाचारी शिक्षण विधियों के प्रयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. सैफुल्लाह खालिद (सचिव, अल-इकरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज) ने कहा कि समावेशी शिक्षा आज के शैक्षिक परिदृश्य का केंद्रीय विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक शिक्षा सभी के लिए समान रूप से सुलभ नहीं होगी, तब तक वास्तविक विकास संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि समावेशी शिक्षा विद्यार्थियों में सहानुभूति, सहयोग एवं सामाजिक समरसता का विकास करती है।
कार्यशाला में प्रशिक्षु अध्यापकों—श्री सौरभ कुमार, सुश्री ममता कुमारी, सुश्री दीपा कुमारी, सुश्री सुमन कुमारी सहित अन्य प्रतिभागियों—ने सक्रिय सहभागिता निभाई। महाविद्यालय के सभी शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी एवं एम.एड., बी.एड. तथा डी.एल.एड. के प्रशिक्षुगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यशाला के दौरान निम्न प्रमुख विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई—
दिव्यांगता एवं विद्यालयी संदर्भ
दिव्यांगता एवं शिक्षक शिक्षा
समावेशी शिक्षा के वर्तमान सरोकार
अक्षमता एवं विद्यार्थी संदर्भ
विशेष रूप से डिस्लेक्सिया, डिसग्राफिया एवं डिसकैलकुलिया जैसे अधिगम विकारों के लक्षण, पहचान एवं समाधान पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का सबसे प्रभावशाली भाग संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र रहा, जिसमें विद्यार्थियों ने खुलकर अपने प्रश्न रखे। मुख्य अतिथि द्वारा उनके प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर दिया गया, जिससे उनकी समझ और अधिक गहरी हुई। इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों ने अपने अनुभव भी साझा किए, जिससे कार्यशाला का वातावरण प्रेरणादायक एवं भावनात्मक बन गया।
समूह चर्चा, गतिविधियों एवं प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रतिभागियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया गया, जो भविष्य में समावेशी कक्षा संचालन में सहायक सिद्ध होगा।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया, जिसमें सभी अतिथियों, आयोजकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
अंततः यह कार्यशाला अपने उद्देश्य में पूर्णतः सफल रही। इसने न केवल प्रतिभागियों के ज्ञान को समृद्ध किया, बल्कि समावेशी दृष्टिकोण को भी सुदृढ़ किया। ऐसी पहलें भविष्य में भी जारी रहनी चाहिए, ताकि शिक्षा को वास्तविक रूप से सर्वसमावेशी बनाया जा सके और प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर प्राप्त हो सके।
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