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राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त छऊ कलाकारों का नगर पंचायत में अभिनंदन अध्यक्ष मनोज चौधरी बोले- छऊ कलाकारों का सम्मान ही हमारी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान

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Jun 11, 2026
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*सरायकेला:* नगर पंचायत कार्यालय में गुरुवार को राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त दो छऊ कलाकारों का गरिमामय अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। सरायकेला की गौरवशाली छऊ परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले प्रतिष्ठित मुखौटा शिल्पकार एवं गुरु श्री सुशांत कुमार महापात्र तथा युवा छऊ कलाकार श्री कुना सामल को उनकी विशिष्ट उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।

 

नगर पंचायत अध्यक्ष *मनोज कुमार चौधरी* ने दोनों कलाकारों को शॉल एवं सम्मान प्रतीक भेंट कर अभिनंदित किया। श्री महापात्र को _संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2025_ और श्री सामल को _उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार_ के लिए चुना गया है।

 

अध्यक्ष चौधरी ने कहा, _“यह सम्मान केवल दो व्यक्तियों की उपलब्धि नहीं, बल्कि सरायकेला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कलाकारों की तपस्या और छऊ कला की राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का सम्मान है। छऊ कलाकारों का सम्मान ही हमारी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान है।”_

 

उन्होंने बताया कि कलाकारों के सम्मान, राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के सुदृढ़ीकरण और कलाकार पेंशन योजना समेत कई प्रस्ताव अंतिम चरण में हैं। _“किसी भी कला परंपरा का संरक्षण तभी संभव है जब कलाकार सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर सकें,”_ उन्होंने कहा।

श्री चौधरी ने सभी कलाकारों से मतभेद भुलाकर एकजुट होने की अपील की। _“सरायकेला छऊ केवल कला नहीं, हमारी पहचान और सामूहिक जिम्मेदारी है। नई पीढ़ी को छऊ से जोड़ना हमारा साझा लक्ष्य होना चाहिए,”_ उन्होंने कहा।

 

कार्यक्रम का संचालन सरायकेला छऊ आर्टिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष *भोला मोहन्ती* ने किया। समारोह में पद्मश्री *शशधर आचार्य*, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित *तपन पटनायक*, *बजेन्द्र पटनायक*, वरिष्ठ फेलोशिप प्राप्त *मनोरंजन साहू*, *काशीनाथ कर*, *रूपेश साहू*, *राकेश कवि*, छऊ शोधकर्ता *अमलेश सिन्हा* सहित बड़ी संख्या में कलाकार और कला प्रेमी मौजूद थे।

 

वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर मिल रहे सम्मान यह प्रमाणित करते हैं कि सरायकेला की छऊ परंपरा आज भी अपनी मौलिकता और कलात्मक उत्कृष्टता के कारण देश-दुनिया में विशिष्ट स्थान रखती है।

 

समारोह के अंत में दोनों कलाकारों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं और छऊ कला के संरक्षण का सामूहिक संकल्प दोहराया गया।


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