
रिपोर्ट,अरुण कुमार सैनी
केंदुआ। कोयलांचल में 1916 से लगी आग बुझा नही पाया स्वतंत्र भारत का यह तस्वीर उपरोक्त बातें झारखण्ड आंदोलनकारी सह रास्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक संघ के राष्ट्रीय संरक्षक हरिपद रवानी ने अपने आवासीय कार्यालय गोधर में एक प्रेस बयान में कही। उन्होंने कहा कि देश को आजाद हुए आज 80 वर्ष बीत रहे है पर इन वर्षों में झरिया कोयलांचल में एक भी कोयला खदान सुरक्षित नही है। आग की लपेटे में आकर तमाम खदाने खाक हो गई है। जिसका नतीजा कहीं भू धंसान,तो कहीं गैस रसाव से लोग बेघर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार कोयला में लगी आग की चर्चा सुनने के बाद हमारे देश के राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम सन 2000 ईo में झरिया पहुंचे थे ।

और अग्नि प्रभावित क्षेत्र ऐना कोलियरी के फायर प्रोजेक्ट का निरीक्षण किए। जिसमे बीसीसीएल सीएमडी,डीजीएमएस, एवं जिला प्रशासन भी मौजूद रहे । निरीक्षण के दौरान उन्होंने बहुत पश्चाताप किए और सभी अधिकारियों को अधिक से अधिक आग पर काबू पाने के लिए बहुत सारे निर्देश भी दिए थे । परंतु उनके जाने के बाद ये अधिकारीगण माननीय कलाम जी के निर्देशों को नजरंदाज कर अपनी मनमानी तरीके से खनन कर कोयला खदानों की माली हालत कर दी । नतीजा यह हुई कि कंपनी में प्रबंधन की गृह लक्ष्मी का वास हुआ और आउटसोर्सिंग का जन्म होना शुरू हो गया। आज पूरे बीसीसीएल में दर्जनों निजी कंपनी कोयले की खनन कर रही है । कोयला का उत्पादन कुछ हो रहा है तो मंत्रालय को रिपोर्ट कुछ और जा रहा है ।

कोयले में बंदरबांट आधा तेरी तो आधा मेरी का शब्द चल रहा है। इसमें झारखण्ड सरकार के राजस्व की भी चोरी हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके अलावे झरिया कोयलांचल में खासकर आगजनी और भू धंसान की घटना से रैयत व अन्य अधिक लोग प्रभावित है । न उन्हें उनकी जमीन को सुरक्षित की जा रही है और न ही बदले में नौकरी , मुआवजा और रोजगार दिया जा रहा है ।
जो न्याय संगत नहीं है। बीसीसीएल प्रबंधन के द्वारा खदानों को असुरक्षित ढंग से चलाने के कारण आज जहां तहां घनी आबादी के बीच भू धंसान हो रहा है। हाल के दिनों में 15 अप्रैल को केंदुआ में धनबाद बोकारो मुख्य मार्ग धंसी,बीच के समय मे कतरास के छाताबाद भू धंसान हुई एवं 17 अगस्त को केंदुआडीह राजपूत बस्ती में भू धंसान हुई । पर बीसीसीएल के कनिष्ठ से लेकर वरीय प्रबंधन के लोग अब तक ठोस कदम उठाने में सक्षम नही दिख रहे है ।
जो बहुत ही चिंतनीय बिषय है । उन्होंने कहा कि प्रबंधन की यह घड़ियाली आंसू बहाने से काम नही चलेगी रैयतों को उनका हक देना ही पड़ेगा। क्योंकि कोयला खनन के दौरान कोयलांचल की धरती पर रैयतों का हक है। जिसका एक बिता जमीन खनन में नही गया है ,वह व्यक्ति हम रैयतों की भूमि पर आउटसोर्सिंग के मालिक है ।
और बीसीसीएल में उनकी समानांतर सरकार चल रही है जो वह कहता है प्रबंधन उसी का सुनता है। बस उनकी एक ही मंशा है रैयतों को उजाड़ना ।
लेकिन मैं यह कहता हूँ कि जहां कहीं भी भू धंसान की घटना होती है उसमे केंद्र सरकार,राज्य सरकार बीसीसीएल प्रबंधन उक्त स्थल पर ठोस कदम उठाने का पहल करें । जिससे रैयत व अन्य प्रभावित लोग उजड़ने से बच सकें । मात्र उजाड़ना ही एक समाधान नही है। बल्कि उनका हक अधिकार देने समाधान है। जिससे गरीब गुरुवों के सपरिवार का गुजर बसर हो सके।जय झारखण्ड।
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