
सरायकेला, 18 अगस्त 2026:- खरसावां प्रखंड अंतर्गत संतारी गांव में सोमवार रात को जहरीले सांप के काटने से दो बच्चों की दुखद मृत्यु हो गई। दोनों बच्चों को परिजन गंभीर अवस्था में सदर अस्पताल, सरायकेला लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
परिजनों एवं ग्रामीणों के अनुसार, सर्पदंश के बाद बच्चों को तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय पहले झाड़-फूंक के लिए ले जाया गया। इस कारण अस्पताल पहुंचने में महत्वपूर्ण विलंब हुआ। बताया गया कि सचिन जोंको के दोनों बच्चे सर्पदंश के बाद बेहोश हो गए थे और स्थानीय उपचार अपनाया गया, जिसके बाद उनकी स्थिति गंभीर होती चली गई।

घटना की जानकारी मिलने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सरायकेला-खरसावां के सचिव श्री तौसीफ मेराज ने सदर अस्पताल पहुंचकर मृत बच्चों के परिजनों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की तथा उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने परिजनों को सरकार की लागू आपदा प्रबंधन योजना के अंतर्गत मिलने वाली सहायता के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के संबंध में भी जानकारी दी।

इस दुखद घटना को गंभीरता से लेते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष सह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री रामाशंकर सिंह के कुशल मार्गदर्शन में सर्पदंश की रोकथाम, तत्काल चिकित्सा उपचार तथा सर्पदंश से संबंधित भ्रांतियों को दूर करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है।
यह अभियान NALSA के मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम के तहत जिला प्रशासन के समन्वय से संचालित किया जाएगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण एवं सुदूर क्षेत्रों में लोगों को यह संदेश देना है कि सर्पदंश एक गंभीर चिकित्सकीय आपातस्थिति है और पीड़ित व्यक्ति को बिना किसी देरी के निकटतम अस्पताल अथवा स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए।
डीएलएसए द्वारा जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ग्रामीणों को झाड़-फूंक एवं अंधविश्वास के बजाय तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने के लिए जागरूक किया जाएगा, ताकि समय पर उपचार मिलने से बहुमूल्य जीवन बचाया जा सके।
इस पहल में वन विभाग के पदाधिकारियों एवं कर्मियों को भी शामिल करने का अनुरोध किया जाएगा, ताकि सर्प बचाव, सुरक्षित तरीके से सांपों को संभालने तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष की परिस्थितियों में उचित प्रतिक्रिया के संबंध में ग्रामीणों को प्रशिक्षण एवं आवश्यक जानकारी प्रदान की जा सके।
मृत बच्चों के परिजनों द्वारा आपदा प्रबंधन योजना के अंतर्गत प्रस्तुत आवेदन को आवश्यक कार्रवाई हेतु सक्षम प्राधिकारी को अग्रसारित किया जाएगा।
इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि सर्पदंश को किसी भी परिस्थिति में हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। समय पर अस्पताल पहुंचाने और उचित चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराने से अनेक जानें बचाई जा सकती हैं। डीएलएसए सरायकेला-खरसावां ने आम लोगों से अपील की है कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय न गंवाएं और तत्काल चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करें।
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