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भारत की पहली पत्रकार डॉ. वैदेही तामण ने कश्मीर की आध्यात्मिक और सभ्यतागत विरासत पर लिखीं पाँच विशेष क्रॉनिकल्स

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Oct 1, 2026
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मुंबई/श्रीनगर: ऐसे समय में जब कश्मीर अक्सर राजनीति, सुरक्षा और समकालीन मुद्दों के संदर्भ में चर्चा का विषय बनता है, महाराष्ट्र की वरिष्ठ पत्रकार, लेखिका और शोधकर्ता डॉ. वैदेही तामण ने एक अनूठी उपलब्धि हासिल की है। कश्मीर की आध्यात्मिक, साहित्यिक और सभ्यतागत विरासत पर पाँच विशेष क्रॉनिकल्स लिखकर वह ऐसा करने वाली भारत की पहली पत्रकार बन गई हैं।

 

पिछले कई वर्षों से डॉ. तामण ने कश्मीर घाटी की व्यापक यात्राएँ कर वहां की प्राचीन परंपराओं, संतों, दार्शनिकों, रहस्यवादियों, सांस्कृतिक विरासत और सभ्यतागत स्मृतियों पर गहन शोध किया है। उनका कार्य कश्मीर के उस पक्ष को सामने लाता है जो मुख्यधारा की पत्रकारिता में अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है।

 

परंपरागत रिपोर्टिंग से अलग, डॉ. तामण की कश्मीर यात्रा वर्षों के फील्ड रिसर्च, विद्वानों, इतिहासकारों, लेखकों, सांस्कृतिक हस्तियों और स्थानीय लोगों के साथ संवाद का परिणाम है। उनका उद्देश्य केवल इतिहास का अध्ययन करना नहीं, बल्कि उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना भी है।

 

उनकी पुस्तकों में “Lal Ded – The Mother of Kashmir”, “Abhinavagupta – The Voice of Eternal Shiva” तथा नीलमत पुराण से जुड़े अध्ययन शामिल हैं। ये कृतियाँ कश्मीर की प्राचीन परंपराओं, पवित्र भूगोल, दर्शन, साहित्य और आध्यात्मिक विकास को विस्तार से प्रस्तुत करती हैं।

 

लाल डेड पर उनकी पुस्तक 14वीं शताब्दी की महान संत-कवयित्री के जीवन और विचारों को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है। वहीं अभिनवगुप्त पर उनका शोध कश्मीर शैव दर्शन, भारतीय सौंदर्यशास्त्र और आध्यात्मिक चिंतन की समृद्ध परंपरा को सामने लाता है।

 

डॉ. तामण का मानना है कि कश्मीर को केवल वर्तमान राजनीतिक परिप्रेक्ष्य से नहीं समझा जा सकता, बल्कि उसकी गहरी सांस्कृतिक और बौद्धिक जड़ों को भी जानना आवश्यक है।

 

डॉ. वैदेही तामण कहती हैं, “कश्मीर सुर्खियों से कहीं अधिक है। उसका दिव्य इतिहास पुस्तकों में संरक्षित होना चाहिए। जो इतिहास लिखा जाता है, वह हमेशा जीवित रहता है। मेरा प्रयास उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजना है।”

 

उनके कार्य को जम्मू-कश्मीर के साहित्यिक और सांस्कृतिक जगत में भी सराहना मिली है। उनकी पुस्तक “Lal Ded – The Mother of Kashmir” का लोकार्पण श्रीनगर में आयोजित लाल डेड लिटरेरी अवॉर्ड्स समारोह में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की उपस्थिति में किया गया था।

 

गुलशन बुक्स, कश्मीर द्वारा प्रकाशित उनकी पुस्तकों ने कश्मीर की साहित्यिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक परंपराओं पर नई चर्चा को जन्म दिया है।

 

डॉ. तामण की पाँच विशेष कश्मीर क्रॉनिकल्स केवल पुस्तकें नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक स्मृति को संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास हैं। उनके लिए कश्मीर केवल एक समाचार नहीं, बल्कि एक इतिहास, एक दर्शन, एक आध्यात्मिक विरासत और एक सभ्यतागत धरोहर है, जिसे समझना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है।


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