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बिहार में जमीन विवादों पर बड़ा फैसला: अब पुलिस नहीं दिला पाएगी कब्जा, 1 फरवरी से नई व्यवस्था लागू

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Feb 1, 2026

 

बिहार सरकार ने राज्य में बढ़ते जमीन विवादों और उनमें पुलिस की अनावश्यक दखलअंदाजी को रोकने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। गृह विभाग और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जारी संयुक्त आदेश के अनुसार, अब पुलिस की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था (Law and Order) बनाए रखने तक सीमित रहेगी।

 

*पुलिस की शक्तियों पर लगा अंकुश*

 

नए नियमों के मुताबिक, पुलिस अब अपनी मर्जी से या किसी एक पक्ष के प्रभाव में आकर किसी को जमीन पर कब्जा नहीं दिला सकेगी। पुलिस का काम अब केवल यह सुनिश्चित करना होगा कि विवाद के कारण शांति भंग न हो। बिना किसी सक्षम प्राधिकार (Competent Authority) या न्यायालय के स्पष्ट आदेश के, पुलिस न तो बाउंड्री वॉल बनवाने में मदद करेगी और न ही किसी प्रकार का निर्माण कार्य शुरू या बंद करवा पाएगी।

 

*थाने में दर्ज होगी विस्तृत जानकारी*

 

अब जमीन विवाद की सूचना मिलते ही पुलिस को ‘स्टेशन डायरी’ में इसकी विस्तृत एंट्री करनी होगी। इस डायरी में निम्नलिखित जानकारियां अनिवार्य रूप से दर्ज की जाएंगी:

 

*दोनों पक्षों का पूरा नाम और पता।*

 

विवाद की प्रकृति (Nature of Dispute)।

 

विवादित जमीन का पूरा विवरण (खाता, खेसरा, रकबा)।

 

पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक कार्रवाई का संक्षिप्त विवरण।

 

प्रशासनिक सख्ती और समीक्षा

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने स्पष्ट किया है कि व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए जनसंवाद कार्यक्रम से एक दिन पहले अंचल स्तर पर कार्यों की गहन समीक्षा की जाएगी। विभाग ने इसके लिए 15 अधिकारियों की विशेष टीम तैनात की है, जो शुरुआती चरण में दरभंगा जैसे क्षेत्रों में अंचलों की निगरानी करेंगे।

 

*जमीन माफियाओं को डिप्टी सीएम की चेतावनी*

 

इस नई व्यवस्था के बीच बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने जमीन माफियाओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कड़े लहजों में कहा कि वे माफियाओं और भ्रष्ट पदाधिकारियों के गठजोड़ को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के आदर्शों का हवाला देते हुए कहा कि वे राज्य को माफिया मुक्त बनाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

 

सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य भूमि विवादों में होने वाले भ्रष्टाचार को रोकना और आम जनता को पुलिसिया उत्पीड़न से बचाना है। अब जमीन के मालिकाना हक का फैसला केवल राजस्व विभाग और अदालत के माध्यम से ही संभव होगा।


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