
पंकज ठाकुर


बड़कागांव। पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव मुकेश कुमार ने अधिकारियों की टीम के साथ विश्व प्रसिद्ध बरवाडीह मेगालिथ स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान पर्यटन निदेशक आसिफ एकराम, हजारीबाग उपायुक्त हेमंत सती सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।निरीक्षण के दौरान वर्ष 2001 में स्थल की खोज करने वाले सुभाशीष दास से अधिकारियों ने इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विशेषताओं की विस्तृत जानकारी ली। दास ने मेगालिथ की संरचना, महत्व और स्थानीय परंपराओं के बारे में विस्तार से बताया।ग्रामीणों द्वारा विकास और जमीन अधिग्रहण को लेकर पूछे गए सवालों पर अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पहले इस स्थल की वैज्ञानिक जांच कर इसकी आयु और महत्व निर्धारित किया जाएगा। इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। उन्होंने बताया कि जमीन रैयती या सरकारी होने के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।स्थानीय ग्रामीण सरयू साव ने बताया कि यह स्थल उनके पूर्वजों के समय से मौजूद है और गांव के लोग इसकी पवित्रता बनाए रखते हैं। कोई भी यहां से पत्थर नहीं हटाता।सचिव मुकेश कुमार ने मुखिया प्रतिनिधि राजकुमार साहू द्वारा निजी खर्च से ₹1.25 लाख में कराई गई घेराबंदी की सराहना करते हुए उन्हें जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित करने की बात कही।सचिव ने कहा कि राज्य सरकार इस मेगालिथ स्थल के संरक्षण को लेकर गंभीर है। इसकी वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी और जरूरत पड़ने पर स्टोनहेंज जैसे अंतरराष्ट्रीय स्थलों के विशेषज्ञों की राय भी ली जाएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि पर्याप्त प्रमाण मिले तो इस स्थल को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य इस ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने के साथ-साथ इसे एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।स्थानीय मीडिया द्वारा पास में भगवान बुद्ध की बिखरी मूर्तियों की जानकारी दिए जाने पर सचिव ने आश्वासन दिया कि विभाग की टीम जल्द ही उस स्थल का भी निरीक्षण कर आवश्यक कदम उठाएगी।मौके पर मुख्य रूप से पर्यटन विभाग के अधिकारी, डीडीसी रिया सिंह, एसडीओ आदित्य पांडे, डीपीआरओ पंकज तिवारी, बड़कागांव बीडीओ जितेंद्र कुमार मंडल, अंचलाधिकारी मनोज कुमार के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों में मुखिया प्रतिनिधि राजकुमार साहू, प्रेम साव, कोमल चंद साहू, दिनेश साहू, सरयू साव सहित कई ग्रामीण मौजूद थे।
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