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पकरी बरवाडीह कोयला खनन परियोजना ने स्थापना से अब तक 100 मिलियन मीट्रिक टन कोयला उत्पादन का आंकड़ा पार किया।

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Apr 30, 2026
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पंकज ठाकुर

 

बड़कागांव। एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड की पकरी बरवाडीह कोयला खनन परियोजना ने स्थापना से अब तक 100 मिलियन मीट्रिक टन कोयला उत्पादन का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह उपलब्धि परियोजना को देश की अग्रणी कोयला खनन परियोजनाओं में मजबूती से स्थापित करती है।

पकरी बरवाडीह परियोजना में कोयला उत्पादन की शुरुआत जनवरी 2017 में हुई थी, जबकि पहला रेल रैक फरवरी 2017 में प्रेषित किया गया। परियोजना को अप्रैल 2019 में वाणिज्यिक घोषित किया गया। तेजी से विकास करते हुए परियोजना ने मई 2023 में 50 एमएमटी उत्पादन का आंकड़ा पार किया था और अब मात्र तीन वर्षों से भी कम समय में इसे दोगुना कर 100 एमएमटी तक पहुंचा दिया है, जो इसकी उच्च कार्यक्षमता और तीव्र परिचालन विस्तार को दर्शाता है। परियोजना की इस उल्लेखनीय प्रगति में कई महत्वपूर्ण अवसंरचनात्मक एवं परिचालन उपलब्धियों की अहम भूमिका रही है। इनमें वर्ष 2022 में कोल हैंडलिंग प्लांट के स्ट्रीम ए एवं बी का कमीशनिंग, दिसंबर 2024 में 20,000वें रैक का प्रेषण, तथा अगस्त 2024 में रैपिड लोडिंग सिस्टम के साथ एकीकरण शामिल हैं, जिससे कोयला परिवहन की दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके अतिरिक्त, परियोजना एशिया की सबसे लंबी क्लोज्ड कोयला कन्वेयर प्रणाली से सुसज्जित है, जो खदान को बनादाग रेलवे साइडिंग से जोड़ती है और पर्यावरण के अनुकूल निर्बाध कोयला परिवहन सुनिश्चित करती है। यह उपलब्धि जनहितकारी नीतियों, त्वरित एवं प्रभावी निर्णय-प्रक्रिया, झारखंड सरकार के सशक्त सहयोग, तथा स्थानीय ग्रामीणों एवं सभी हितधारकों के सतत समर्थन का प्रतिफल है। साथ ही, शीर्ष प्रबंधन के निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग ने भी परियोजना के सुचारु क्रियान्वयन एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए परियोजना प्रमुख (पीबी एवं पीबी-एनडब्लू सीएमपी) सुब्रत कुमार दास ने कहा कि यह उपलब्धि पूरी टीम की अथक मेहनत, समर्पण और सभी हितधारकों के अमूल्य सहयोग का परिणाम है। उन्होंने कहा कि परिचालन, सुरक्षा एवं सामुदायिक सहभागिता के समन्वित प्रयासों से ही इस प्रकार के मील के पत्थर हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि पकरी बरवाडीह परियोजना सतत खनन प्रथाओं को अपनाते हुए देश की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।


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