
धनबाद: धनबाद जिले में संचालित भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL), ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) और विभिन्न आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर की जा रही ओवर बर्डन (OB) डंपिंग के खिलाफ झारखंड विधानसभा की विशेष समिति (प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण) ने कड़ा रुख अपनाया है।
अपने दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन आज समिति ने धनबाद सर्किट हाउस में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसके बाद दामोदर नदी के किनारे स्थित ओबी डंपिंग स्थलों का जमीनी निरीक्षण किया।यह महत्वपूर्ण समीक्षा और निरीक्षण कार्यक्रम समिति के सभापति सह माननीय विधायक (टुंडी) श्री मथुरा प्रसाद महतो की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस अवसर पर समिति के सदस्य सह माननीय विधायक (सिंदरी) श्री चंद्रदेव महतो, माननीय विधायक (निरसा) श्री अरूप चटर्जी,

माननीय विधायक (चंदनकियारी) श्री उमाकांत रजक एवं माननीय विधायक (तोरपा) श्री सुदीप गुड़िया मुख्य रूप से उपस्थित रहे।सर्किट हाउस में कोयला कंपनियों और प्रशासन के साथ उच्च स्तरीय बैठकनिरीक्षण से पूर्व धनबाद सर्किट हाउस में विधानसभा के विशेष सचिव, जिला प्रशासन के आला अधिकारियों और बीसीसीएल व ईसीएल के प्रबंधकों के साथ एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में माननीय विधायकों ने कंपनियों द्वारा रैयतों (स्थानीय भू-स्वामियों), सरकारी भूमि तथा फॉरेस्ट लैंड (वन भूमि) पर जबरन किए जा रहे अवैध खनन और ओबी डंपिंग की गंभीर समस्या पर अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। समिति ने स्पष्ट किया कि विकास और

खनन के नाम पर स्थानीय लोगों के अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।दामोदर नदी पर ओबी डंप का स्थल निरीक्षणबैठक के बाद विशेष समिति के सदस्य सीधे दामोदर नदी के तटीय क्षेत्रों में पहुंचे। निरीक्षण के दौरान समिति ने खनन गतिविधियों से उत्पन्न गंभीर पर्यावरणीय प्रभावों और नदी प्रदूषण की स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा लिया। ओबी डंप का मलबा नदी में गिरने के कारण लाइफलाइन मानी जाने वाली दामोदर नदी के अस्तित्व पर गहरा संकट मंडरा रहा है।
समिति ने निरीक्षण के दौरान निम्नलिखित कड़े कदम उठाए:सुरक्षा और पर्यावरण मानकों की जांच: अधिकारियों से ओबी डंपिंग की वर्तमान स्थिति, सुरक्षा मानकों के अनुपालन और पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाए जा रहे कदमों की बिंदुवार जानकारी मांगी गई।स्थानीय जनसमस्याओं का आकलन: प्रदूषण और अवैध डंपिंग के कारण स्थानीय ग्रामीणों को हो रही बीमारियों, जल संकट और विस्थापन की समस्याओं को गंभीरता से सुना गया।लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी: पर्यावरण नियमों की अनदेखी करने वाली आउटसोर्सिंग कंपनियों और जिम्मेवार अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई।
विधानसभा पटल पर रखी जाएगी विस्तृत रिपोर्टनिरीक्षण के उपरांत समिति के सभापति श्री मथुरा प्रसाद महतो ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा, “दामोदर नदी और झारखंड की संपदा को कौड़ियों के भाव बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा।
इस दो दिवसीय दौरे, समीक्षा और स्थल निरीक्षण के दौरान जो भी कमियां और अवैध गतिविधियां पाई गई हैं, उनकी एक विस्तृत और तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार कर झारखंड विधानसभा पटल पर सौंपी जाएगी, ताकि दोषी कंपनियों पर भारी जुर्माना और सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।”
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