
चांडिल अनुमंडल सह प्रखण्ड क्षेत्र के मातकमडीह पंचायत अंतर्गत रायडीह टोला गूंगुकोचा (पहाड़िया बस्ती) और कादलाकोचा गांवों में ग्रामीणों की अलग अलग दो बैठकें आयोजित की गई, जिनमें गांवों की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई।
पहली बैठक गूंगुकोचा में हुई, जिसमें विशेष रूप से वन पट्टा मिले लोगों को चौदह साल बाद भी जमीन पर दखल नहीं दिए जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए अपने स्तर पर ज़मीनों को चिह्नित कर सीमांकन करते हुए दख़ल करने की सहमति बनी।

गूंगुकोचा तक आने के लिए कोई सड़क नहीं बनी है और नाले पर पुलिया भी नहीं बनने के कारण लोगों को आवागमन में काफी दिक्कत होती है विशेष रूप से इस पर वर्षा के समय।

तीन साल पहले यहां एक पानी टंकी का निर्माण शुरू हुआ था, लेकिन अभी तक यह पूरा नहीं हुआ है। पानी टंकी का निर्माण लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) द्वारा किया जा रहा है, जैसी कि जानकारी मिली। इससे दो पंचायतों मातकमडीह और धूनाबुरु को पानी की आपूर्ति की जानी है। इसका निर्माण कार्य क्यों पूरा नहीं हुआ है, इसके बारे में संबद्ध विभाग से जानकारी लेने की बात की गई।
टोला गूंगुकोचा, जहां लगभग तीस पहाड़िया (आदिम जन जाति) परिवार रहते हैं, जिन्हें कई बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। किसी महिला को झारखंड मुख्यमंत्री मईया सम्मान योजना का लाभ नहीं मिल रहा है।
मातकमडीह गाँव में हुई बैठक में विशेष रूप से ग्राम सभा के अधिकारों और वन रक्षा को लेकर चर्चा की गई। यहां भी कई बुनियादी सुविधाएं लोगों को नहीं मिल रही हैं, इस पर चर्चा के क्रम में यह महसूस किया गया कि अपने अधिकारों को लेकर जागरूकता का लोगों में अभाव है। आगे एकजुट होकर न्याय के लिए संघर्ष करने का निर्णय लिया गया।
दोनों बैठकों में ग्रामीणों के अलावा विशेष रूप से वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद अंजुम, सौरभ कुमार (SRUTI, Delhi), डोमन बास्के, विकास कुमार, अंकुर शाश्वत और शशांक शेखर मौजूद रहे।
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