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केज कल्चर से बदली जिंदगी: युधिष्ठिर भुमिज बने आत्मनिर्भरता की मिसाल

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Jul 5, 2026
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*सोनुवा* पश्चिमी सिंहभूम जिले के सोनुवा प्रखंड के बांसकाटा गांव निवासी युधिष्ठिर भुमिज ने मत्स्य विभाग की ब्लू रिवोल्यूशन योजना के तहत केज कल्चर तकनीक अपनाकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। कभी मजदूरी और पारंपरिक मछली पकड़ने पर निर्भर रहने वाले युधिष्ठिर आज आधुनिक मत्स्य पालन के जरिए सालाना लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं।

 

जानकारी के अनुसार, जलाशय समिति के माध्यम से उन्हें मत्स्य विभाग की केज कल्चर योजना की जानकारी मिली। इसके बाद विभागीय विशेषज्ञों से प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्होंने जलाशय में वैज्ञानिक पद्धति से केज स्थापित कर मछली पालन शुरू किया। विभाग द्वारा अनुदान, तकनीकी सहयोग और नियमित मार्गदर्शन मिलने से उन्होंने आधुनिक मत्स्य पालन की तकनीकों को सफलतापूर्वक अपनाया।

 

वर्तमान में युधिष्ठिर भुमिज पंगास और तिलापिया जैसी व्यावसायिक प्रजातियों का पालन कर प्रतिवर्ष लगभग 6 टन मछली का उत्पादन कर रहे हैं। इससे उन्हें सालाना 4 से 5 लाख रुपये तक की आय हो रही है। उनकी इस सफलता से न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि आसपास के ग्रामीण और युवा भी आधुनिक मत्स्य पालन की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

 

युधिष्ठिर भुमिज ने कहा कि मत्स्य विभाग की योजना और अधिकारियों के मार्गदर्शन ने उनके जीवन की दिशा बदल दी है। अब वे आत्मविश्वास के साथ अपने परिवार का बेहतर भविष्य सुनिश्चित कर पा रहे हैं और अन्य युवाओं को भी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे रहे हैं।

 

जिला मत्स्य पदाधिकारी नवीन कुमार ने बताया कि केज कल्चर तकनीक कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आय का प्रभावी माध्यम है। विभाग लाभुकों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और आवश्यक सहयोग प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि युधिष्ठिर भुमिज की सफलता योजना की प्रभावशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

 

वहीं उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का लक्ष्य सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लाभुकों तक पहुंचाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। युधिष्ठिर भुमिज की उपलब्धि यह साबित करती है कि सरकारी सहयोग, आधुनिक तकनीक और कड़ी मेहनत के बल पर ग्रामीण क्षेत्रों में भी विकास और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।

 

युधिष्ठिर भुमिज की सफलता की यह कहानी जिले के युवाओं और ग्रामीणों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है तथा यह संदेश देती है कि सही अवसर और दृढ़ इच्छाशक्ति से हर सपना साकार किया जा सकता है।


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