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कबीरधाम में बंधुआ मजदूरी कर रहे बैगा जनजाति के 13 बच्चों को कराया गया मुक्त, 10 आरोपी गिरफ्तार

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May 7, 2026
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बच्चों से बंधुआ मजदूरी और ट्रैफिकिंग के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करते हुए कबीरधाम (पूर्व का नाम कवर्धा) जिले के सुदूर घने जंगलों में बंधुआ मजदूरी कर रहे संरक्षित बैगा जनजाति के 13 बच्चों को मुक्त कराया गया। आठ से 15 साल की उम्र के इन बच्चों से मवेशियों की देखभाल का काम लिया जाता था। पुलिस ने 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर मामला दर्ज कर लिया है। इस कार्रवाई को पुलिस, चाइल्डलाइन, महिला एवं बाल विकास विभाग और एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन (एवीए) ने संयुक्त रूप से अंजाम दिया।

 

इस बाबत एवीए की सूचना पर जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए पूरे अभियान का नेतृत्व किया। एवीए बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के काम कर रहे नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) का सहयोगी संगठन है। एवीए लगभग दो हफ्ते से इस ट्रैफिकिंग गिरोह की गतिविधियों पर नजर रख रहा था और पुष्टि हो जाने के बाद उसने जिला पुलिस से सूचना साझा की।

 

कबीरधाम के पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने कहा, “सूचना मिलते ही हमने कार्रवाई शुरू कर दी। इन बच्चों से बंधुआ मजदूरी कराई जा रही थी और ये बेहद अमानवीय स्थिति में रह रहे थे। एफआईआर दर्ज कर ली गई है और इस नेटवर्क में शामिल सभी तत्वों की गिरफ्तारी के लिए खोजबीन जारी है। हम सुनिश्चित करेंगे कि अपराधियों को जल्द से जल्द न्याय के कठघरे में लाया जाए।”

 

ट्रैफिकर परिजनों को पैसे व बेहतर सुविधाओं का लालच देकर इन बच्चों को लगभग 7-8 महीने पहले यहां लाए थे, जहां एक पशुपालन फार्म में इनसे रोजाना दस घंटे काम कराया जाता था। एफआईआर के अनुसार इन्हें महीने में महज एक या दो हजार रुपए दिए जाते थे।

 

छापे की कार्रवाई में शामिल टीम बच्चों की दयनीय हालत देखकर भौंचक्की रह गई। शुरू में मवेशी पालन फार्म से चार बच्चे मुक्त कराए गए। इसके बाद ये बच्चे अधिकारियों को उस जगह ले गए जहां और बच्चे बंधुआ मजदूरी कर रहे थे। पूरे दिन चले इस अभियान में जिले के विभिन्न स्थानों से कुल 13 बच्चे मुक्त कराए गए।

 

एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा, “यह बचाव अभियान इस तथ्य को उजागर करता है कि हाशिये पर पड़े जनजातीय समुदायों के बच्चे किस तरह मानव दुर्व्यापार गिरोहों के बढ़ते निशाने पर हैं। ये गिरोह ऐसे समुदायों की लाचारी व असुरक्षा का फायदा उठाते हैं और परिवारों को थोड़े से पैसों का लालच व झूठे वादे कर अपने जाल में फंसाते हैं। यह अत्यंत चिंताजनक है कि आठ साल के बच्चों को भी खतरनाक और अमानवीय परिस्थितियों में काम करने के लिए धकेला जा रहा है। वहीं, इस कार्रवाई में शामिल टीमों और पुलिस की तत्परता सराहनीय है और व्यवस्था के प्रति हमारे भरोसे को मजबूत करती है। अब हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि बचाए गए सभी 13 बच्चों के समुचित पुनर्वास, मुआवजा और शिक्षा के इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं ताकि उनका खोया हुआ बचपन उन्हें लौटाया जा सके।”

देर रात तक चले इस अभियान में मुक्त कराए गए सभी बच्चों को बाल संरक्षण संस्थानों में भेज दिया गया और देखभाल व पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू करने के लिए इन्हें बाल संरक्षण समिति के समक्ष पेश किया गया। पुलिस ने गिरफ्तार दुर्व्यापारियों के खिलाफ ट्रैफिकिंग, बंधुआ मजदूरी, बाल मजदूरी और किशोर न्याय कानून के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है।


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