
सरायकेला : नीमडीह थाना क्षेत्र की झिमड़ी शांखा नदी में कथित अवैध बालू खनन का मामला फिर सुर्खियों में है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां कोई सरकारी बालू घाट नहीं होने के बावजूद रात के अंधेरे में बड़े पैमाने पर बालू का अवैध उठाव और परिवहन हो रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि दिन में कम, लेकिन शाम ढलते ही ट्रैक्टरों की आवाजाही तेज हो जाती है। रात भर नदी से बालू निकालकर आसपास के इलाकों में पहुंचाया जा रहा है। लगातार खनन से नदी के तल और किनारों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं और नदी का प्राकृतिक स्वरूप बदल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर रोक नहीं लगी तो शांखा नदी नाला बनकर रह जाएगी।

सबसे बड़ा सवाल है कि एनजीटी की रोक के बावजूद यह कारोबार कैसे चल रहा है? ग्रामीण पूछ रहे हैं कि क्या रात में नियम बदल जाते हैं? प्रशासन की निगरानी कहां है?

इसका सीधा असर गरीबों पर पड़ रहा है। आरोप है कि रघुनाथपुर और चांडिल में एक ट्रैक्टर बालू की कीमत 4000 से 5000 रुपये तक पहुंच गई है, जिससे पीएम आवास और अबुआ आवास योजना के लाभुकों का घर बनाना मुश्किल हो रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि इससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है और पर्यावरण भी बर्बाद हो रहा है। उन्होंने मांग की है कि रात में विशेष गश्ती, वाहनों की जांच और नदी घाटों पर औचक छापेमारी कर सख्त कार्रवाई की जाए।
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