
एक साल भी नहीं टिक सकी करोड़ों की सड़क, जीतपुर में फिर भू-धसान; विधायक रागिनी सिंह ने निर्माण गुणवत्ता पर उठाए सवाल, भारी वाहनों के समय में बदलाव और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
झरिया।

झरिया-जीतपुर-जामाडोबा मुख्य मार्ग पर एक बार फिर हुए भू-धसान ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता और संवेदनशील कोयलांचल क्षेत्र में विकास कार्यों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते दिन शाम लगभग 6 बजे मुख्य सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। राहत की बात यह रही कि घटना के समय कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने हजारों लोगों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।

यह सड़क झरिया, जीतपुर और जामाडोबा को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है, जहां से प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं। इसी मार्ग से डिनोबिली, कार्मेल, डीएवी सहित कई सरकारी एवं निजी विद्यालयों के हजारों छात्र-छात्राएं भी आवागमन करते हैं। सड़क धंसने के बाद आम लोगों, स्कूली बच्चों और स्थानीय व्यवसायियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी इसी स्थान पर तीन से चार बार भू-धसान हो चुका है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि पिछले कार्यकाल में करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह सड़क एक वर्ष भी नहीं टिक सकी। ऐसे में निर्माण कार्य की गुणवत्ता और उसकी तकनीकी निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
घटना की सूचना मिलते ही झरिया विधायक रागिनी सिंह घटनास्थल पर पहुंचीं और जिला प्रशासन, टाटा स्टील यूआईएसएल तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ मौके का निरीक्षण किया। उन्होंने सड़क के नीचे बनी खाली जगह (गॉफ) और धंसे हिस्से का जायजा लिया तथा अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
निरीक्षण के दौरान टाटा स्टील यूआईएसएल के अधिकारियों ने विधायक को बताया कि प्रभावित स्थल पर लगभग 10 फीट तक चारों ओर बालू भरकर गॉफ भराई का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है। इसके बाद तकनीकी मानकों के अनुरूप सड़क की मरम्मत की जाएगी ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
घटनास्थल से ही विधायक रागिनी सिंह ने धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन से दूरभाष पर बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने सड़क की शीघ्र मरम्मत, प्रभावित क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था, निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच तथा दोषी ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की।
विधायक ने यह भी कहा कि जीतपुर क्षेत्र से बड़ी संख्या में टाटा कंपनी के भारी वाहन गुजरते हैं। संवेदनशील भू-धसान प्रभावित क्षेत्र को देखते हुए इन भारी वाहनों के परिचालन के समय (टाइमिंग) में बदलाव किया जाना चाहिए, ताकि दिन के समय आम नागरिकों और स्कूली बच्चों को होने वाली परेशानी कम हो तथा सड़क पर अतिरिक्त दबाव भी नियंत्रित किया जा सके। उन्होंने संबंधित विभागों और कंपनी प्रबंधन से इस संबंध में समन्वय स्थापित कर जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया।
रागिनी सिंह ने कहा कि झरिया जैसे भू-धसान प्रभावित क्षेत्र में केवल सड़क बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निर्माण से पहले भू-वैज्ञानिक अध्ययन, भूमिगत गॉफ की स्थिति का आकलन और निर्माण के बाद नियमित तकनीकी निगरानी भी उतनी ही आवश्यक है। यदि इन मानकों की अनदेखी की जाएगी तो करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़कें लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रह पाएंगी।
स्थानीय लोगों ने भी सवाल उठाया कि जब क्षेत्र पहले से ही भू-धसान की दृष्टि से संवेदनशील है, तो बार-बार अस्थायी मरम्मत करने के बजाय स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल क्यों नहीं की जा रही है। लोगों का कहना है कि अब उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि सुरक्षित और टिकाऊ सड़क चाहिए।
विधायक रागिनी सिंह का बयान
“जीतपुर में सड़क धंसने की घटना अत्यंत गंभीर है। यह सड़क पिछले कार्यकाल में बनी थी, लेकिन एक वर्ष भी नहीं टिक सकी। इसकी गुणवत्ता की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और यदि निर्माण में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। मैंने उपायुक्त श्री आदित्य रंजन से दूरभाष पर बात कर सड़क की शीघ्र मरम्मत, गॉफ भराई कार्य में तेजी, प्रभावित क्षेत्र की सुरक्षा तथा भारी वाहनों के परिचालन के समय में बदलाव की मांग की है, ताकि आम लोगों और स्कूली बच्चों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। झरिया की जनता की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके साथ किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।”
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