
बरियो, गोविंदपुर, धनबाद, 12 अगस्त 2026
मानव सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अल-इकरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, बरियो, गोविंदपुर, धनबाद के राष्ट्रीय सेवा योजना (एन.एस.एस.) यूनिट-1 एवं पी.एम.सी.एच. अस्पताल, धनबाद के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार, 12 अगस्त 2026 को महाविद्यालय परिसर में रक्तदान शिविर सह जन सहयोग कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. मो. शमीम अहमद के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में किया गया।

रक्तदान शिविर का मुख्य उद्देश्य समाज में स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना, जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहयोग देना तथा विद्यार्थियों में सेवा, सहयोग, मानवीय संवेदना एवं सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना था। कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त अध्यापकगण, शिक्षकेतर कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे और उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

इस अवसर पर प्राचार्य प्रो. डॉ. मो. शमीम अहमद ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान प्रदान करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में मानवीय मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी है। रक्तदान जैसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को समाज की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ते हैं और उन्हें मानव सेवा के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ व्यक्ति द्वारा किया गया स्वैच्छिक रक्तदान किसी जरूरतमंद के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। उन्होंने महाविद्यालय के विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों से सामाजिक एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज में सेवा और सहयोग की संस्कृति को मजबूत करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
रक्तदान शिविर में पी.एम.सी.एच. अस्पताल, धनबाद की चिकित्सा टीम एवं संबंधित कर्मियों का सहयोग भी प्राप्त हुआ। चिकित्सा टीम द्वारा रक्तदान से संबंधित आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रियाओं एवं सावधानियों का पालन करते हुए शिविर का संचालन किया गया। रक्तदान के इच्छुक व्यक्तियों के लिए आवश्यक चिकित्सकीय जाँच एवं मार्गदर्शन की व्यवस्था की गई। एन.एस.एस. यूनिट-1 के स्वयंसेवकों ने रक्तदान शिविर को व्यवस्थित एवं सफल बनाने में सक्रिय योगदान दिया। स्वयंसेवकों ने आगंतुकों का मार्गदर्शन किया और रक्तदान के महत्व से संबंधित जानकारी साझा की। उनके प्रयासों से कार्यक्रम में अनुशासन और सुव्यवस्था बनी रही।
कार्यक्रम में उपस्थित अध्यापकों ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि रक्तदान केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है। रक्त की आवश्यकता किसी भी व्यक्ति को कभी भी पड़ सकती है। दुर्घटना, गंभीर बीमारी, शल्य चिकित्सा, प्रसव संबंधी जटिलताओं तथा अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों में समय पर रक्त उपलब्ध होना जीवनरक्षक सिद्ध हो सकता है। महाविद्यालय के शिक्षकेतर कर्मचारियों ने भी कार्यक्रम में सक्रिय सहयोग प्रदान किया। महाविद्यालय परिवार की सामूहिक सहभागिता ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रक्तदान शिविर ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि एक जिम्मेदार शिक्षक को अपने विद्यार्थियों को केवल विषयगत ज्ञान नहीं देना चाहिए, बल्कि उनमें मानवता, परोपकार, सहानुभूति और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करनी चाहिए। शिक्षक-प्रशिक्षण संस्थान के रूप में इस कार्यक्रम का विशेष महत्व रहा। महाविद्यालय के विद्यार्थी भविष्य में शिक्षक के रूप में समाज एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं। ऐसे सामाजिक कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता उन्हें केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं देती, बल्कि सेवा, नेतृत्व, अनुशासन, सहयोग और सामाजिक संवेदना जैसे जीवन-मूल्यों से भी परिचित कराती है।
कार्यक्रम की सफलता पर महाविद्यालय परिवार ने एन.एस.एस. यूनिट-1 एवं पी.एम.सी.एच. अस्पताल, धनबाद की पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही, कार्यक्रम में सहयोग करने वाले सभी अध्यापकगण, शिक्षकेतर कर्मचारी एवं विद्यार्थियों को धन्यवाद दिया गया। महाविद्यालय प्रशासन ने भविष्य में भी इसी प्रकार के सामाजिक एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को निरंतर आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि जब शैक्षणिक संस्थान, चिकित्सा संस्थान और समाज एक साथ मिलकर जनहित में कार्य करते हैं, तो सामाजिक जागरूकता और मानव सेवा को नई दिशा मिलती है।
अंततः यह रक्तदान शिविर “मानवता की सेवा ही सच्ची सेवा है” की भावना को साकार करने वाला कार्यक्रम सिद्ध हुआ। अल-इकरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, बरियो, गोविंदपुर, धनबाद द्वारा आयोजित यह पहल सामाजिक सरोकार, जनसहयोग और मानवीय संवेदना की एक सराहनीय मिसाल बनकर सामने आई।
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