
*धनबाद :* आगलगी की घटना ने कई प्रश्न छोड़ गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जहां दम घुटने से पांच लोग और एक कुत्ते की मौत हो गई, उस स्थान से निकलने के तीन रास्ते थे।
एक अवासीय क्षेत्र में जानेवाली सीढ़ी से, दूसरा क्लीनिक के क्षेत्र के ऊपर जानी वाली सीढ़ी और तीसरा विकल्प इनके पास सीधे छत पर जाने वाला रास्ता। प्रश्न उठता है कि अगर नीचे धुआं था तो छत से पीछे उतरा जा सकता था, लेकिन पांचों ने ऐसा नहीं किया, यह आश्चर्य की बात है।
कर्मी बताते हैं कि ग्रील गेट में ताला लगा था, इसलिए समय नहीं मिल पाया। बाद में तो राहतकर्मियों ने ही ताला तोड़ा। बताया कि चाभी अंदर सो रहे लोगों के पास ही था, लेकिन क्या भागने का इतना भी समय नहीं मिला कि कोई चाभी लेकर ताला खोल पाए। जबकि अंदर की भागदौड़ और डॉ विकास हाजरा का बाथटब में जाना यह दर्शाता है कि जिंदगी बचाने के लिए लोगों ने काफी मशक्कत की।

*एप्रोन क्यों पहने थे डॉ विकास हाजरा*

बताया जाता है कि सरस्वती पूजा का भोग वितरण और भजन संध्या रात के एक बजे तक चला। इसके बाद सभी सोने चले गए। लेकिन देर रात अगलगी की घटना के बाद जब राहत कार्य चला और दमकलकर्मियों ने उन्हें जब बाथरूम के टब से बाहर निकाला तो वह एप्रोन पहने हुए थे। ऐसा भी नहीं था कि वो ओटी से बाहर आए थे क्योंकि वे तो क्लीनिक की तरफ गए ही नहीं। इसका जिक्र पुलिसकर्मियों ने पंचनामे के दौरान और अग्निशमन विभाग ने अपनी जांच रिपोर्ट में भी किया है।
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