
जमशेदपुर । सोना देवी विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. नीत नैना ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि ज्ञान को समाज की आवश्यकताओं से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि फार्मेसी के विद्यार्थियों के पास विज्ञान, स्वास्थ्य और समाज—तीनों क्षेत्रों के बीच सेतु बनने का अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपनी शिक्षा का उपयोग स्वास्थ्य-जागरूकता बढ़ाने, लोगों को दवाओं के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक करने और समाज में स्वस्थ जीवनशैली के प्रति सकारात्मक वातावरण बनाने में करें। उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर सीखने, नई तकनीक अपनाने और अपने व्यक्तित्व में नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) ब्रज मोहन पाट पिंगुआ ने कहा कि फार्मेसी शिक्षा आज स्वास्थ्य क्षेत्र में तेजी से हो रहे परिवर्तन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक विज्ञान, तकनीक, शोध और नवाचार से भी जुड़ना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे समस्याओं को केवल चुनौती के रूप में न देखें, बल्कि उन्हें शोध और नवाचार के अवसर के रूप में समझें। दवा निर्माण, औषधीय अनुसंधान, गुणवत्ता नियंत्रण, डिजिटल हेल्थ और जनस्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में विद्यार्थियों के लिए व्यापक संभावनाएँ हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को ऐसा शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, जहाँ वे ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल, शोध क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित कर सकें। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने ज्ञान का उपयोग मानव जीवन को बेहतर बनाने के लिए करने का संदेश दिया। वहीं विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि देश का भविष्य युवाओं के कंधों पर है। उन्होंने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक है, जब उसका लाभ व्यक्ति के साथ-साथ समाज और राष्ट्र को भी मिले। उन्होंने विद्यार्थियों से शोध, नवाचार, कौशल विकास और रचनात्मक सोच को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि फार्मेसी के क्षेत्र में नई दवाओं, नई तकनीकों और स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित अनुसंधान की अपार संभावनाएँ हैं। विद्यार्थियों को इन अवसरों को पहचानते हुए अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग देशहित में करना चाहिए।

श्री सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में शिक्षा और कौशल की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने के साथ-साथ समाज की आवश्यकताओं को समझें और ऐसे शोध एवं नवाचार को बढ़ावा दें, जिसका प्रत्यक्ष लाभ आम नागरिकों को मिल सके। उन्होंने विद्यार्थियों को “ज्ञान को रोजगार से आगे बढ़ाकर राष्ट्र निर्माण से जोड़ने” का संदेश देते हुए कहा कि युवा केवल अपने भविष्य के निर्माणकर्ता नहीं हैं, बल्कि वे देश के भविष्य के भी महत्वपूर्ण सहभागी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से ईमानदारी, अनुशासन, परिश्रम और सेवा-भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में बी.फार्मा पाँचवें सेमेस्टर के विद्यार्थी संदीप सिंह देव ने कुलाधिपति, कुलपति, कुलसचिव, मुख्य अतिथि, विशेष अतिथि, प्राचार्य, शिक्षकगण, विद्यार्थियों एवं आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इसके पश्चात राष्ट्रीय गान एवं राष्ट्रगीत के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ। अंत में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने सामूहिक छायाचित्र के माध्यम से इस महत्वपूर्ण आयोजन की स्मृतियों को संजोया।
विश्व फार्मासिस्ट दिवस–2026 का यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य-जागरूकता, सामाजिक उत्तरदायित्व, जनसेवा, शोध, नवाचार और राष्ट्र निर्माण की दिशा में अपनी भूमिका को समझने का महत्वपूर्ण अवसर बना। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि एक सक्षम, संवेदनशील और जिम्मेदार फार्मासिस्ट स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में हर्ष वर्मा, किशोर कुमार, उमा महतो, सफीनाज तैयबा, प्रतीक तिवारी आदि की सार्थक भूमिका रही।
सोना देवी विश्वविद्यालय में विश्व फार्मासिस्ट दिवस–2026 का भव्य आयोजन
सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला के स्कूल ऑफ फार्मेसी द्वारा विश्व फार्मासिस्ट दिवस–2026 के अवसर पर शुक्रवार को विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में भव्य शैक्षणिक, जागरूकता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष विश्व फार्मासिस्ट दिवस की थीम “Empowering Pharmacists for a Healthier Future” रही। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को फार्मेसी के व्यापक सामाजिक एवं व्यावसायिक दायित्वों से परिचित कराना तथा स्वस्थ समाज के निर्माण में फार्मासिस्ट की भूमिका के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं कुलाधिपति प्रभाकर सिंह, कुलपति प्रो. (डॉ.) ब्रज मोहन पाट पिंगुआ, कुलसचिव डॉ. नीत नैना, स्कूल ऑफ फार्मेसी के प्राचार्य सुधांशु शांडिल्य, मुख्य अतिथि डॉ. सुंदर लाल मार्डी, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, CHC केंदाडीह, विशेष अतिथि जितेंद्र सिंह देव, BTT Trainer, CHC केंदाडीह, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ बी.फार्मा पाँचवें सेमेस्टर के विद्यार्थी संदीप सिंह देव द्वारा स्वागत एवं कार्यक्रम परिचय से हुआ। इसके पश्चात गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया गया। दीप प्रज्वलन के माध्यम से ज्ञान, सेवा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सकारात्मक योगदान का संदेश दिया गया।
अतिथि सम्मान के क्रम में मुख्य अतिथि डॉ. सुंदर लाल मार्डी को विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं कुलाधिपति श्री प्रभाकर सिंह द्वारा सम्मानित किया गया। वहीं विशेष अतिथि जितेंद्र सिंह देव को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) ब्रज मोहन पाट पिंगुआ द्वारा सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने फार्मेसी और स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर PPT Presentation, लघु नाटिका, गीत एवं नृत्य प्रस्तुत किए। बी.फार्मा तृतीय सेमेस्टर की छात्रा मौसमी महतो ने मनमोहक “सिन्हा जी” नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया।
इसके बाद पाँचवें सेमेस्टर के विद्यार्थी संदीप सिंह देव ने PPT Presentation प्रस्तुत करते हुए फार्मासिस्ट की भूमिका, जिम्मेदारियों एवं स्वास्थ्य व्यवस्था में उसके महत्व को रेखांकित किया। इसके पश्चात Pharmacy Oath के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपने पेशे के प्रति ईमानदारी, जिम्मेदारी और सेवा-भावना के साथ कार्य करने का संकल्प लिया।
स्कूल ऑफ फार्मेसी के प्राचार्य श्री सुधांशु शांडिल्य ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि फार्मेसी केवल दवाओं के निर्माण, वितरण अथवा औषधीय ज्ञान तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह सीधे मानव जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ अत्यंत जिम्मेदार क्षेत्र है। एक फार्मासिस्ट की भूमिका मरीज को सही दवा उपलब्ध कराने के साथ-साथ दवा के उचित उपयोग, निर्धारित मात्रा, संभावित दुष्प्रभाव और सुरक्षित औषधि सेवन के संबंध में सही जानकारी उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि आज स्वास्थ्य क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। नई दवाओं, नई तकनीकों, डिजिटल हेल्थ और वैज्ञानिक अनुसंधान के बढ़ते प्रभाव के बीच फार्मेसी के विद्यार्थियों के सामने व्यापक अवसर और जिम्मेदारियाँ दोनों हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित न रहें, बल्कि निरंतर अध्ययन, शोध, प्रयोगात्मक ज्ञान और कौशल विकास पर ध्यान दें। उन्होंने विद्यार्थियों को मानवता, नैतिकता, अनुशासन और सेवा-भावना को अपने पेशे का आधार बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे फार्मासिस्टों की आवश्यकता है, जो वैज्ञानिक रूप से दक्ष होने के साथ-साथ मरीजों की भावनाओं और आवश्यकताओं को भी समझें।
कार्यक्रम में शारदा रानी, पाँचवें सेमेस्टर, ने गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद पाँचवें सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने क्षय रोग (Tuberculosis) विषय पर लघु नाटिका प्रस्तुत कर टीबी के लक्षण, सावधानियों और समय पर उपचार के महत्व के प्रति जागरूक किया। सातवें सेमेस्टर की छात्रा रिया परिछा ने Antimicrobial Resistance विषय पर PPT Presentation प्रस्तुत की। उन्होंने एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के अनुचित एवं अनावश्यक उपयोग से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। इसके बाद तृतीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने Generic Medicine विषय पर लघु नाटिका प्रस्तुत की। प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों ने दवाओं के प्रति सही जानकारी, चिकित्सकीय सलाह के अनुसार औषधि सेवन और जन-जागरूकता के महत्व को रेखांकित किया।
विशेष अतिथि जितेंद्र सिंह देव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा का क्षेत्र सीधे मानव जीवन से जुड़ा हुआ है और इस क्षेत्र में कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी सामान्य पेशे से कहीं अधिक होती है। उन्होंने कहा कि फार्मेसी के विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग केवल व्यक्तिगत करियर निर्माण के लिए नहीं, बल्कि समाज की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भी करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, समय की पाबंदी, व्यवहार-कुशलता और सेवा-भावना को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता की अभी भी बड़ी आवश्यकता है और युवा फार्मासिस्ट इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इसके बाद मोहान यादव, तृतीय सेमेस्टर, द्वारा PPT Presentation तथा अंशु कुमारी, सातवें सेमेस्टर, द्वारा वक्तव्य प्रस्तुत किया गया। प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने Drug Abuse विषय पर प्रभावशाली लघु नाटिका प्रस्तुत कर नशे के बढ़ते दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। प्रस्तुति में विद्यार्थियों ने युवाओं को नशे से दूर रहने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा समाज में सकारात्मक वातावरण निर्माण करने का संदेश दिया।
मुख्य अतिथि डॉ. सुंदर लाल मार्डी, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, CHC केंदाडीह, ने अपने संबोधन में कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था को प्रभावी बनाने में चिकित्सकों के साथ-साथ फार्मासिस्टों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। फार्मासिस्ट दवाओं से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी रखने वाला स्वास्थ्य क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है और मरीजों तक सुरक्षित एवं उचित औषधि पहुँचाने में उसकी जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होती है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि भविष्य में जब वे स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी सेवाएँ दें, तो मरीज को केवल एक व्यक्ति या उपभोक्ता के रूप में न देखें, बल्कि उसकी बीमारी, परिस्थिति और आवश्यकता को समझते हुए संवेदनशील व्यवहार करें। उन्होंने दवाओं के सुरक्षित उपयोग, सही जानकारी और जिम्मेदार औषधि सेवन के प्रति लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि फार्मेसी के विद्यार्थियों को अपने ज्ञान को समुदाय से जोड़ना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य-जागरूकता कार्यक्रमों, रोग-निवारण, दवा संबंधी जानकारी और स्वस्थ जीवनशैली के प्रचार-प्रसार में युवा फार्मासिस्ट प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम के अगले चरण में बी.फार्मा तृतीय सेमेस्टर की छात्रा बालेस्वरी मंडी ने “गड़बड़ समाचार” विषय पर प्रस्तुति दी। इसके पश्चात तृतीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने “Agomoni” पर समूह नृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भर दिया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने सभागार में उत्साह और उमंग का वातावरण बनाया।
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