
नई दिल्ली :रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सिक्किम में अचानक आई बाढ़ के बाद लापता हुए सैनिकों के एक समूह में शामिल आठ सैन्यकर्मियों के शव शनिवार को बरामद कर लिए गए. राजनाथ ने सिक्किम में बादल फटने से आई बाढ़ के कारण लोगों की मौत पर भी शोक व्यक्त किया.रक्षा मंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘हाल ही में सिक्किम में एक हिमनदी झील के फटने से आई बाढ़ में आठ सैन्यकर्मियों सहित बहुमूल्य जिंदगियों की दुखद क्षति से बहुत दुखी हूं.’ सिंह ने कहा कि ‘लापता 23 सैनिकों में से एक को बचा लिया गया जबकि आठ बहादुर सैनिकों के शव बरामद कर लिए गए. राष्ट्र की सेवा में अग्रिम क्षेत्रों में तैनात रहते हुए उनके बलिदान को भुलाया नहीं जाएगा.
उन्होंने कहा कि ‘शेष 14 सैनिकों और लापता नागरिकों को बचाने के लिए तलाशी अभियान जारी है.’ आर्मी चीफ मनोज पांडे ने भी शोक जताया है. उन्होंने ट्वीट किया ‘दुख की इस घड़ी में हम शोक संतप्त परिवारों के साथ मजबूती से खड़े हैं.शेष 14 लापता सैनिकों और अन्य नागरिकों का पता लगाने और उन्हें बचाने के लिए ठोस खोज और बचाव प्रयास जारी हैं.सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसएसडीएमए) की रिपोर्ट के अनुसार, मरने वालों की संख्या 26 दर्ज की गई और 142 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं. इसमें कहा गया है कि 2413 लोगों को बचाया गया है और अचानक आई बाढ़ में 1203 घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं.
सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने शनिवार को कहा कि ‘राज्य के मंगन जिले के चुंगथांग में 1200 मेगावाट का बांध टूटने के बाद तीस्ता नदी में अचानक आई बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ.’ उन्होंने राज्य में पिछली सरकार पर घटिया निर्माण कार्य का आरोप लगाया. सीएम ने स्थिति का आकलन करने के लिए मंगन के नागा गांव में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और राहत शिविरों का दौरा किया और आज सुबह वहां लोगों से बातचीत की।

सिक्किम हिमालय में ल्होनक ग्लेशियर 3 अक्टूबर को फट गया. झील का एक किनारा टूटने से तीस्ता में जल स्तर बढ़ गया और राज्य के कई इलाके जलमग्न हो गए. सिक्किम सरकार ने सिंगतम, रंगपो, डिक्चू और आदर्श गांव में 18 राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. हालांकि, चुंगथांग से कनेक्टिविटी की कमी के कारण, वहां राहत शिविर भारतीय सेना और अन्य अर्धसैनिक बलों द्वारा स्थापित किए जा रहे हैं.

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