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सीएम केजरीवाल की गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सामने ईडी को तीखे सवालों का करना पड़ा सामना

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ByAdmin Office

May 20, 2024

 

अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर फिर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से तीखे सवाल किए। कोर्ट ने ईडी से पूछा कि आपने केजरीवाल की गिरफ्तारी के वक्त रीजन टू बिलीव यानी कोई विश्वसनीय कारण दर्ज किया था? ईडी के वकील ने मना किया तो कोर्ट बोला- नहीं ऐसा नहीं होता है।

नई दिल्ली: दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से कई सवाल किए हैं। ईडी से सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि केजरीवाल की गिरफ्तारी के वक्त रीजन टु बिलीव (विश्वसनीय कारण) दर्ज किया था? इस पर अडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि इस तथ्य को देना जरूरी नहीं है।

तब सुप्रीम कोर्ट ने आश्चर्य जताया और कहा कि ऐसा नहीं है। कानून कहता है कि गिरफ्तारी के वक्त पीएमएलए एक्ट की धारा-19 के तहत जांच अधिकारी को विश्वसनीय कारण दर्ज करना होता है कि आरोपी दोषी है। बहरहाल सुप्रीम कोर्ट ने आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती वाली उनकी याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।

‘हमें सिसोदिया की बेल खारिज होने के बाद के गवाह के बयान चाहिए’आबकारी नीति मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत आरोपी दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल द्वारा उनकी गिरफ्तारी को चुनौती वाली याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली बेंच ने केजरीवाल को पहले से एक जून तक अंतरिम जमानत दे रखी है। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से कहा है कि वह उन गवाहों के बयान देखा चाहते हैं जो बयान मनीष सिसोदिया की जमानत अर्जी खारिज होने के बाद और अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी से पहले दर्ज की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से इस मामले में फाइल पेश करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि अरविंद केजरीवाल इस मामले में ट्रायल कोर्ट के सामने अगर चाहें तो जमानत अर्जी दाखिल करने के लिए स्वतंत्र हैं।

‘गिरफ्तारी के वक्त कोई विश्वसनीय कारण दिया था?’
सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से सवाल किया कि आपने गिरफ्तारी के वक्त विश्वसनीय कारण दर्ज कराया था? अडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि इस तथ्य को देना जरूरी नहीं है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया का आप गिरफ्तारी के वक्त रीजन टु बिलीव (विश्वासीय कारण) कैसे नहीं देंगे? तब कैसे कोई कारण को चुनौती देगा? इस पर अडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि जांच अधिकारी को यह कारण देना जरूरी नहीं है। इस पर जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा कि ऐसा नहीं है बिल्कुल नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रबीर पुरकायस्थ केस में दिए गए जजमेंट को रेफर किया।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रबीर केस में अपने फैसले में कहा था कि रिमांड अर्जी में गिरफ्तारी का आधार लिखित तौर पर देने होते हैं और मौजूदा मामले में रिमांड ऑर्डर से पहले रिमांड की कॉपी आरोपी प्रबीर और उनके वकील को मुहैया नहीं कराया गया और गिरफ्तारी अमान्य करार दे दिया था।

‘तय करें कि जो मटीरियल है वह दोषी करार देने योग्य है’

सुप्रीम कोर्ट में अडिशनल सॉलिसिटर जनरल राजू ने कहा कि अगर आरोपी को गिरफ्तारी से पहले ही मटीरियल दे दिया जाएगा तो यह छानबीन को प्रभावित कर देगा। इस पर जस्टिस खन्ना ने सवाल किया कि पीएमएलए एक्ट की धारा-19 गिरफ्तारी की शक्ति को परिभाषित करता है।

इसमें दोषी (गिल्टी) शब्द लिखा हुआ है। इसका मतलब है कि छानबीन करने वाला जांच अधिकारी को इस बात को विश्वास करने का कारण होना चाहिए कि जो भी मटीरियल उसके पास है वह आरोपी को दोषी करार देने के लिए पर्याप्त है। यहां रीजन टु बिलीव की बात है। वहीं पीएमएलए एक्ट की धारा-45 जमानत को डील करता है और उसके मुताबिक कोर्ट को पहली नजर में संतुष्ट होना है कि आरोपी दोषी नहीं है।

‘क्या हम कानून की अनिवार्यता को बदल सकते हैं?’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आमतौर पर जांच अधिकारी तब तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं करते हैं जब तक कि पर्याप्त मटीरियल यह ना दिखाता हो कि आरोपी दोषी है। यानी मटीरियल एक स्टैंडर्ड का होना चाहिए और यह विश्वसनीय कारण होना चाहिए जांच अधिकारी के लिए कि मटीरियल के तहत आरोपी दोषी है। जब अडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि संदेह अगर स्टैंडर्ड है तो जांच अधिकारी गिरफ्तार कर सकता है।

तब बेंच इस दलील से संतुष्ट नहीं हुई। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दत्ता ने कहा कि क्या हम कानून की अनिवार्यता को बदल सकते हैं? आप रीजन टु बिलीव (विश्वास का कारण) को रिजनेबली संदिग्ध यानी यथोचित संदिग्ध पढ़ रहे हैं। वहीं अडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि कोर्ट तभी मामले में दखल दे सकता है जब गिरफ्तारी बिना मटीरियल के हो। अपर्याप्त मटीरियल को छानबीन के स्टेज में न्यायिक तौर पर स्क्रूटनी नहीं किया जा सकता है। ईडी की ओर से कहा गया कि ईडी प्रोसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल कर रही है ताकि आम आदमी पार्टी को आरोपी बनाया जा सके।

केजरीवाल के पक्ष वाले गवाहों को नहीं दी तरजीह : सिंघवी
केजरीवाल की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ईडी ऑफिसर ने एक बयान को तरजीह दी है जबकि 9 बयान ऐसे थे जो केजरीवाल को दोषमुक्त करते थे लेकिन उसे नजरअंदाज किया। हवाला ट्रांजक्शन के आरोप पर सिंघवी ने कहा कि गिरफ्तारी के आधार में कुछ भी नहीं लिखा गया है।

उसमें कोई मटीरियल नहीं है। केजरीवाल पर रिश्वत के आरोपों का जवाब देते हुए सिंघवी ने कहा कि इस मामले में डेढ़ साल तक छानबीन चलती रही और छानबीन के दौरान कोई एक्शन नहीं लिया गया। जुलाई अगस्त 2023 से जो मटीरियल थे उस पर ईडी ने कोई गिरफ्तारी की जरूरत नहीं समझी। ईडी ने आरोप लगाया कि केजरीवाल और हवाला ऑपरेटर के बीच चैट है। इस पर सिंघवी ने कहा कि गिरफ्तारी की वैधता को गिरफ्तारी के वक्त मटीरियल से संतुष्ट करना होगा।

जिन गवाहों के बयान पर केजरीवाल क गिरफ्तार किया गया उसकी विश्वसनीयता पर भी सिंघवी ने सवाल किया। उ्न्होंने कहा कि गवाह पी. सारथ रेड्डी ने बीजेपी को इलेक्टोरल बॉन्ड से चंदा दिया और उसे बेल दी गई।


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