
*धनबाद :* एसएनएमएमसीएच के शिशु राेग विभाग में इस माह 1 से 19 तारीख के बीच 50 नवजातों की माैत हाे चुकी है। इनमें 0 से लेकर तीन दिन तक के नवजात शामिल हैं। डॉक्टरों के मुताबिक जिन नवजातों की मौत हुई, उनमें 70% काे सांस लेने (रेस्पिरेटरी) की समस्या थी।
जन्म के तुरंत बाद नवजात के नहीं राेने और प्री-मेच्याेर बच्चाें की माैत भी इनमें शामिल हैं। नवजात बच्चाें की माैत का कारण अस्पताल के एनआईसीयू में पर्याप्त संसाधन का नहीं हाेना भी बताया जा रहा हैहै। पर्याप्त डाॅक्टर और कर्मचारी नहीं हैं।
नवजात के लिए वार्मर की संख्या सीमित है ताे 12 बेड का आईसीयू में उपलब्ध एकमात्र वेंटिलेटर भी खराब है। यह हाल तब है तब सरकार शिशु मृत्यु दर काे कम से कम करना चाहती है अाैर इसके लिए कई याेजनाएं भी संचालित हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार की याेजनाएं केवल कागजाें पर चल रही हैं? वहीं एसएनएमएमसीएच के चिकित्सकों का दावा है कि पड़ोसी जिलों के अस्पताल में रेफर करने की खतरनाक प्रवृति है। जब तक नवजात यहां लाए जाते हैं, उनकी स्थिति और बिगड़ चुकी होती है।
अस्पताल से मिले आंकड़ाें के अनुसार सितंबर में इलाज के दौरान जिन नवजातों की मौत हुई, उनमें 75 प्रतिशत दूसरे जिलाें से रेफर हाेने के बाद एसएनएमएमसीएच के आईसीयू में इलाज के लिए लाए गए थे। इनमें सबसे अधिक 17 नवजात पड़ाेसी जिला गिरिडीह से भर्ती कराए गए। वहीं 19 दिनाें में जामताड़ा व धनबाद के 13-13 नवजात ने आईसीयू में दम ताेड़ दिया।

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