
सरायकेल खरसावां जिले के बहुउद्देशीय परियोजना परियोजना के बने चांडिल डैम जलाशय में आए दिन चर्चा की विषय बने हुए है, दूरदराज राज्यों से पहुंचे पर्यटकों में चर्चा वन हुए चांडिल डैम में

नौका बिहार में बोटिंग करने के दौरान लोगो ने नजदीक से हाथी की झुंड को जलक्रीड़ा करते देखा ओर गदगद हो गया ,कहता हे आज के समय दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी ओर गज परियोजना में हाथियों की झुंड देखने को नहीं मिलता ,मुश्किल से एक से पांच हाथी देखने को मिलता हे।

193.22 ब्रज में फैले हुए दलमा सेंचुरी से हाथी की झुंड को पर्याप्त भोजन ओर पानी नहीं मिलने के कारण करीब आठ सालों से एलिफेंट की झुंड भोजन ओर पानी की तलाश में ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में डेरा डाला हुआ हे। पर्यटकों की मानना हे लंबी समय से भ्रमण करने दलमा सेंचुरी जाते उस दौरान जंगली जानवर देखने को मिलता जो दूरभाग हे इतने बड़े सेंचुरी में जहां गज आश्रयणी हैं ओर हाथी की उपस्थित न हो जो जांच की विषय हे।
ओर चांडिल डैम जलाशय किनारे जंगल ओर प्राकृतिक रूप हर भरा हुआ है,वही भोजन ओर पानी की पर्याप्त मात्रा मिलने के कारण आज ईचागढ़ क्षेत्र हाथियों की झुंड डेरा डाले हुए हे। किसी झुंड में 35 ओर 15, एंब 9 की संख्या में देख गया ।
भीषण गर्मी के दौरान हाथियों की झुंड 12 से 2 बजे एवं 4से 5 बजे की बीच जंगल से उतर कर डैम जलाशय में हाथी की झुंड जल क्रीड़ा करने पहुंच जाते हैं यह दृश्य अद्भुत आकृषित का केंद्र बना हुआ हे।
चांडिल वन क्षेत्र अधीन पड़ता हे सवाल यह हे कि आज के दौर में दलमा ईको सेंसेटिव जॉन एंब ट्यूरियम को बढ़ावा दिया जाता हे, कहा वन एवं पर्यावरण विभाग एंब पर्यटन विभाग द्वारा द्वारा करोड़ो रुपए की लागत से कोई योजना दलमा सेंचुरी में पर्यटकों बढ़ावा देने के योजना का कार्य चल रहा है।लेकिन वन जीवजंतु की पलायन पर विभाग मौन क्यों..?
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