
सरायकेला : चांडिल बांध का जलस्तर लगातार बढ़ने और 1867.780 क्यूमेक्स पानी की निकासी के बाद विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने विभागीय अधिकारियों से 8 सवाल पूछे हैं। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन की बैठकें और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है।
*19 अगस्त 2026, शाम 4:00 बजे की स्थिति*

बांध का जलस्तर 181.27 मीटर पहुंच चुका है। रेडियल गेट, स्लुइस और नहरों से कुल 1867.780 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। इसके बावजूद जलस्तर में लगातार वृद्धि से नदी किनारे के गांवों में दहशत है।

*मंच के 8 सवाल*
1. *पूर्व योजना कहां थी?* मौसम विभाग पहले से बारिश की चेतावनी दे रहा था, फिर जलस्तर नियंत्रित करने की प्रभावी योजना पहले क्यों नहीं बनी?
2. *180 RL का लक्ष्य फेल* – विभाग की नीति 180 RL पर जलस्तर रखने की थी, तो लगातार बारिश में 180 RL से ऊपर जाने का अनुमान क्यों नहीं लगाया गया?
3. *संकट के बाद रणनीति* – क्या जलस्तर बढ़ने के बाद ही पानी छोड़ने की योजना बनाई जाएगी? क्या यही आपदा प्रबंधन है?
4. *बैठक के निर्णय कागज तक सीमित* – आपदा बैठक में लिए गए निर्णय जमीन पर क्यों नहीं दिख रहे?
5. *वैज्ञानिक योजना है या नहीं?* क्या बारिश, जल आवक और निचले क्षेत्रों की क्षमता का आकलन करने की कोई पूर्व निर्धारित वैज्ञानिक योजना है?
6. *जमशेदपुर का हवाला* – अब कहा जा रहा है अधिक पानी नहीं छोड़ सकते वरना बाढ़ आएगी। तो इसका पूर्व अनुमान पहले क्यों नहीं था?
7. *चरणबद्ध निकासी क्यों नहीं?* भारी बारिश की संभावना थी तो पानी की चरणबद्ध निकासी पहले क्यों नहीं की गई?
8. *विस्थापितों की सुरक्षा योजना* – विस्थापितों और नदी किनारे के लोगों की सुरक्षा के लिए विभाग की लिखित कार्ययोजना क्या है?
राकेश रंजन महतो, अध्यक्ष, विस्थापित अधिकार मंच ने कहा जल प्रबंधन संकट के बाद प्रतिक्रिया का विषय नहीं है। यह पूर्व योजना और मौसम पूर्वानुमान से जुड़ा है। प्यास लगने के बाद कुआं नहीं खोदा जाता। बारिश से पहले ही ठोस और वैज्ञानिक योजना बननी चाहिए थी।”
उन्होंने मांग की कि बांध के जलस्तर, आवक और निकासी की नियमित और सार्वजनिक जानकारी दी जाए। साथ ही विस्थापितों और संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
There is no ads to display, Please add some


Post Disclaimer
स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com
