
सरायकेला : ईचागढ़ प्रखंड के हार्डआत गांव में जंगली हाथी के हमले में एक ही परिवार के 4 सदस्यों की मौत के बाद वन विभाग ने गंभीर चिंता जताई है। वनरक्षी वशिष्ठ नारायण महतो ने जनता को संदेश जारी कर कहा है कि जल-जंगल-जमीन की लूट और बालू के अवैध खनन से ही हाथी-मानव संघर्ष बढ़ रहा है।


क्या है पूरा मामला..? बीते दिनों हार्डआत गांव में रात के समय जंगली हाथी ने घर पर हमला कर दिया। इस हमले में मां-बेटी समेत एक ही परिवार के 4 सदस्यों की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।
वनरक्षी वशिष्ठ नारायण महतो ने सवाल उठाया कि इसके पीछे जिम्मेदारी सिर्फ वन विभाग की है या फिर हाथियों के परंपरागत आवास को खत्म करने वाले बालू माफिया भी इसके लिए जिम्मेदार हैं?
*जांच में चौंकाने वाला खुलासा:* गहन अध्ययन और जांच के दौरान यह पाया गया कि हाथी इससे पहले भी इस कॉरिडोर में आ चुका था, लेकिन इतनी बड़ी मुठभेड़ कभी नहीं हुई। हाथी विशेषज्ञों ने इसका एकमात्र कारण हाथी कॉरिडोर में हो रहे अवैध बालू के खनन काँची करकरी नदी के साथ स्वर्णरेखा नदी
हाड़त गाँव स्वर्ण रेखा नदी के किनारे है और परिवहन को बताया है।
वनरक्षी महतो ने बताया कि कांची और करकरी नदी के किनारे रात-दिन जेसीबी और हाईवा से अवैध बालू खनन हो रहा है। तेज लाइट, शोर और वाहनों की आवाजाही से हाथियों का प्राकृतिक रास्ता बाधित हो गया है। भटककर हाथी गांवों की ओर आ रहे हैं। खनन से नदी किनारे के जंगल भी उजड़ गए हैं, जिससे हाथियों को भोजन-पानी नहीं मिल रहा।
आपदा पूर्व प्रबंधन जरूरी।
वनरक्षी ने कहा कि जिससे इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए आपदा पूर्व प्रबंधन जरूरी है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की:
1. *रात में जंगल-नदी किनारे न जाएं* – हाथी शाम 6 से सुबह 6 बजे तक सक्रिय रहते हैं।
2. *अवैध खनन की सूचना दें* – 1800-345-1947 टोल फ्री पर शिकायत करें।
3. *फसल की सुरक्षा करें* – खेतों के चारों ओर मिर्च पाउडर, मधुमक्खी बक्से लगाएं।
4. *हाथी दिखने पर अफवाह न फैलाएं* – तुरंत वन विभाग को 1926 पर कॉल करें।
डीएफओ सरायकेला ने कहा कि हार्डआत घटना की जांच के लिए टीम गठित की गई है। मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही अवैध बालू खनन पर रोक के लिए पुलिस-खनन विभाग के साथ संयुक्त अभियान चलेगा।
पिछले 6 महीने में इचागढ़, नीमडीह और कुकड़ू में हाथी के हमले में 9 लोगों की मौत हो चुकी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि दलमा-चांडिल एलिफेंट कॉरिडोर में खनन सबसे बड़ी वजह है।
*जंगल बचेगा तो हाथी बचेगा, हाथी बचेगा तो हम बचेंगे* वनरक्षी वशिष्ठ नारायण महतो का संदेश।
There is no ads to display, Please add some


Post Disclaimer
स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com
