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श्रम दिवस सिर्फ उत्सव नहीं, अधिकारों का प्रतीक: राकेश रंजन महतो”

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May 1, 2026
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सरायकेला : अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस, आज विश्व श्रम दिवस है। हर साल पूरे दुनिया में 1 मई को दुनिया भर के सभी श्रमिक भाई, बहन और बंधु मिलकर श्रम दिवस मनाते हैं। लेकिन क्या आपको मालूम है यह दिन क्यों मनाया जाता है? सिर्फ ईमानदारी से कंपनियों के लिए मेहनत से काम करना, अपने जीवन का वह मूल्यवान समय देना ही नहीं होता, इसके अलावा कंपनियों से अपना हक और अधिकार लेना भी है, उनको याद दिलाना भी है।

 

इस अवसर पर विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने कहा कि श्रम दिवस केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि यह श्रमिकों के संघर्ष, अधिकार और सम्मान का प्रतीक है। इसकी शुरुआत 19वीं सदी में हुई थी, जब मजदूरों ने 8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे अपने जीवन के लिए मांग उठाई थी। इस आंदोलन ने दुनिया भर में श्रमिक अधिकारों की नींव रखी। आज भी यह दिन हमें याद दिलाता है कि श्रमिकों के बिना किसी भी देश की अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती।

 

उन्होंने आगे कहा कि बीते दिनों एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां चांडिल अनुमंडल स्थित चौका के खूंटी गांव में *नर्सिंग इस्पात लिमिटेड* में कार्यरत एक मजदूर जो कि चांडिल डैम प्रभावित कुड़ुकतूपा गांव के विस्थापित चंपई मांझी का एक पैर कट गया। यह घटना न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कई कंपनियां आज भी श्रमिकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह निभाने में विफल हैं। हादसे के बाद भी कंपनी द्वारा मजदूर को उसका पूरा हक और उचित मुआवजा नहीं दिया जाना गंभीर चिंता का विषय है। जबकि हर एक श्रमिक का यह मूल अधिकार है कि उसे सुरक्षित कार्यस्थल और दुर्घटना की स्थिति में पूरा आर्थिक सहयोग मिले।

 

महतो ने आगे कहा कि श्रम दिवस के अवसर पर यह जरूरी है कि हम सिर्फ शुभकामनाएं देने तक सीमित न रहें, बल्कि श्रमिकों की वास्तविक समस्याओं पर भी ध्यान दें। आज भी कई जगहों पर मजदूरों को न्यूनतम वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल, स्वास्थ्य सुविधाएं और सामाजिक सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं।

 

यह दिन हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम सच में श्रमिकों के अधिकारों का सम्मान कर रहे हैं? क्या कंपनियां अपने कर्मचारियों के प्रति संवेदनशील हैं? और क्या सरकार द्वारा बनाए गए श्रम कानूनों का सही तरीके से पालन हो रहा है?

 

श्रमिक सिर्फ एक “वर्कफोर्स” नहीं हैं, बल्कि वे देश की प्रगति की रीढ़ हैं। इसलिए इस श्रम दिवस पर जरूरी है कि हर श्रमिक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो, और हर संस्था उनके सम्मान और सुरक्षा को प्राथमिकता दे। तभी इस दिन का वास्तविक महत्व सार्थक हो पाएगा।


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