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लखीसराय जिला की महत्ता और यहां के चर्चित धर्म स्थल जिसकी गाथा दुर दुर तक चर्चाओं में।

ByAdmin Office

Jan 28, 2024

 

अंतर्कथा प्रतिनिधि सौजन्य इंटरनेट

पाल वंश के स्वर्णिम काल में लखीसराय एक स्थापित प्रशासनिक एवं धार्मिक केंद्र माना जाता था। लखीसराय के इस क्षेत्र की पहचान पुराने समय में चट्टानों, पहाड़ों और विभिन्न हिंदू और बौद्ध देवी-देवताओं की मूर्तियों के स्थान के रूप में की जाती थी। बौद्ध साहित्य में इस स्थान को अंगुत्री के नाम से जाना जाता है। इसका अर्थ है- जिला। प्राचीन काल में यह अंग प्रदेश का सीमांत क्षेत्र था। लखिसराय जिला का बिहार राज्य में एक सुंदर और महत्वपूर्ण स्थान है। यह जिला 3 जुलाई 1994 को स्थापित किया गया था। यह बिहार के मुंगेर प्रमंडल का एक जिला है। यहाँ का क्षेत्रफल 1228 sq.km है। इस जिला में कुल 479 गांव और 2 नगर पालिका है। यहां मगही बोलने वालों की संख्या (2002) लगभग 10 करोड़ 30 लाख है। मुख्य रूप से यह बिहार के पटना, राजगीर, नालंदा, जहानाबाद,गया, अरवल, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, जमुई, मुंगेर, औरंगाबाद और झारखंड के पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा, कोडरमा , हजारीबाग , गिरीडीह और देवघर के इलाकों में बोली जाती है। जिले में केवल एक उप-विभाजन लखीसराय शामिल है, जो सात विकास खंडों में विभाजित है, इनमे लखीसराय, सूरजगढ़ा, बरहिया, हलसी, पिपरिया, रामगढ़ चौक और चानन शामिल हैं। यहां दो विधानसभा सूर्यगढ़ा और लखीसराय पड़ता है। यहां चर्चित स्थलों में अशोक धाम है जो लखीसराय जिले का एक मुख्य पर्यटन स्थल है। इस मंदिर को इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर बहुत सुंदर है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। मंदिर परिसर बहुत बड़ा और साफ सुथरा है। यह मंदिर अच्छी तरह से मैनेज किया जाता है। यहां पर सभी प्रकार की पूजा होती है। यहां पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है। मंदिर के बाहर, बहुत बड़ा बगीचा है। मंदिर के अंदर शिव भगवान के दर्शन करने को मिलते हैं। मंदिर के गर्भगृह में बहुत बड़ा शिवलिंग विराजमान है। यह मंदिर प्राचीन है। इस मंदिर में विराजमान शिवलिंग की खोज एक लड़के के द्वारा की गई थी, जिसका नाम अशोक था। इसलिए इस मंदिर को अशोक धाम के नाम से जाना जाता है। वह लड़का यहां पर गुल्ली डंडा खेल रहा था और उसे शिवलिंग दिखाई पड़ा। यहां मां पार्वती जी का भी मंदिर बना हुआ है। इस प्राचीन मंदिर के परिसर भी अपने महत्ता रखता है। यहां पर प्राचीन मूर्तियां भी रखी गई है। इस मंदिर का उद्घाटन गुरु शंकराचार्य के द्वारा किया गया था। यहां आकर लोगो को बहुत अच्छा लगता है और शांति मिलती है। मंदिर का शिखर बहुत सुंदर है। मंदिर का शिखर सफेद रंग का है और शिखर में विभिन्न देवी देवताओं और सुंदर नक्काशी की गई है। यहां सावन सोमवार और महाशिवरात्रि के समय बहुत सारे लोग भगवान शिव के दर्शन करने के लिए आते हैं। यह मंदिर पटना लखीसराय हाईवे सड़क से कुछ ही दूरी पर स्थित है यहां लोग आसानी से पहुंच सकते हैं। दूसरे पर्यटक स्थल में जलप्पा स्थान का नाम आता है।जलप्पा स्थान लखीसराय का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यहां पर जलप्पा माता के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यह मंदिर प्राचीन है। यहां पर मंगलवार को बहुत ज्यादा भीड़ लगती है। लोग यहां मंगलवार और शनिवार को दुध लेकर मां जलप्पा को अर्पण करते है। लोगों का यह मानना है, कि यहां पर जो कोई भी अपनी मनोकामना मांगेगा। उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है। इसलिए लोग यहां पर हर सोमवार को आते हैं। जलप्पा मंदिर लखीसराय में चानन गांव के पास स्थित है। मंदिर के आसपास प्राकृतिक दृश्य देखने के लिए मिलता है। यहां पर आपको पहाड़ी का सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है। मंदिर में सभी देवी देवताओं को दूध चढ़ाया जाता है। तीसरा पर्यटक स्थल श्रृंगी ऋषि आश्रम है। श्रृंगी ऋषि आश्रम लखीसराय का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। श्रृंगी ऋषि आश्रम लखीसराय जिले में सूर्यगढ़ा प्रखंड में स्थित है। यह जगह पहाड़ों के बीच में स्थित है। मंदिर में आपको शिव भगवान जी, पार्वती माता जी और श्री गणेश जी के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यह सभी प्रतिमाएं प्राचीन है। यह जगह चारों तरफ से प्राकृतिक सौंदर्य से घिरी हुई है। यहां पर आपको ऊंचे ऊंचे पहाड़ और पेड़ पौधे देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर आपको एक कुंड देखने के लिए मिलता है, जिसके बारे में कहा जाता है, कि इस कुंड में पानी सालभर भरा रहता है और इस कुंड का पानी कहां से आता है और कहां निकलता है। इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। इस कुंड में स्नान भी किया जा सकता है। इस जगह के बारे में कहा जाता है, कि प्राचीन समय में यहां पर श्री दशरथ जी ने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ किया था और यहां पर राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न जी का मुंडन संस्कार किया गया था। यह जगह बहुत सुंदर है और यहां पर बरसात के समय घूमने पर आनंद आया है,क्योंकि बरसात में यहां पर चारों तरफ हरियाली देखने के लिए मिलती है। यहां आने के लिए सड़क अच्छी नहीं है पर अब इसमें सुधार आ गया है। यहां तक आने के लिए गाड़ी और बाइक संग अब लोग चार चक्के का इस्तेमाल करते हैं। चौथा पर्यटक स्थल मां जगदंबा मंदिर है। मां जगदंबा मंदिर लखीसराय का प्रसिद्ध मंदिर है। मां जगदंबा लखीसराय में बड़हिया में स्थित है। यह मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। यहां पर दूर-दूर से लोग माता के दर्शन करने के लिए आते हैं। इस मंदिर को मां बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर की स्थापना महान संत श्रीधर ओझा ने की थी। यहां पर माता के दर्शन पिंडी रूप में करने के लिए मिलते हैं। यह मंदिर बहुत ही भव्य तरीके से बना हुआ है। मंदिर में सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध है। यहां लोगो को शांति मिलती है। यह मंदिर एक और कारण से प्रसिद्ध है। कहा जाता है, कि कोई भी जहरीला सांप या जहरीला जीव काट लेता है, तो उसका यहां इलाज होता है। यहां एक पवित्र कुआं है, जिसके जल से उसका इलाज किया जाता है। यहां मंदिर का गर्भगृह बहुत सुंदर है। गर्भगृह की दीवारें और स्तंभ बहुत सुंदर है। यहां नवरात्रि के समय बहुत सारे लोग माता के दर्शन करने के लिए आते हैं।


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