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रिसर्च की क्वालिटी और ग्लोबल विजिबिलिटी बढ़ाने के लिए आईआईटी (आईएसएम) में वर्कशॉप

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Nov 3, 2026
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रिपोर्ट,अरुण कुमार सैनी

केंदुआ(धनबाद) रिसर्च की क्वालिटी बेहतर बनाने, रिसर्च पेपर्स की ग्लोबल विजिबिलिटी बढ़ाने और फैकल्टी मेंबर्स, रिसर्च स्कॉलर्स व स्टूडेंट्स को आधुनिक डिजिटल रिसर्च टूल्स के इस्तेमाल से परिचित कराने के उद्देश्य से आईआईटी (आईएसएम) धनबाद की सेंट्रल लाइब्रेरी ने क्लैरिवेट एनालिटिक्स के सहयोग से हाल ही में ‘मेक योर रिसर्च काउंट’ विषय पर एक वर्कशॉप आयोजित की। इसका मुख्य फोकस भरोसेमंद रिसर्च लिटरेचर की पहचान, रिसर्च वर्क को आसान और प्रभावी बनाना, रिसर्च परफॉर्मेंस का आकलन, पब्लिकेशन के लिए सही जर्नल का चयन और रिसर्च के ग्लोबल इम्पैक्ट को बढ़ाने पर रहा।

कार्यक्रम में आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के डिप्टी डायरेक्टर प्रो. सरत कुमार दास उपस्थित थे। उनके साथ सेंट्रल लाइब्रेरी के प्रोफेसर-इन-चार्ज प्रो. सुमंत के. पाढ़ी, संस्थान के लाइब्रेरियन पार्थ डे और डिप्टी लाइब्रेरियन सतीश कुमार भी मौजूद थे।

वर्कशॉप में क्लैरिवेट की लीड सॉल्यूशन कंसल्टेंट (रिसर्च एंड एनालिटिक्स) डॉ. सुभाश्री नाग ने रिसोर्स पर्सन के रूप में हिस्सा लिया। उन्होंने क्लैरिवेट के इंटीग्रेटेड रिसर्च इकोसिस्टम के तहत वेब ऑफ साइंस, रिसर्च असिस्टेंट, एंडनोट और इनसाइट्स जैसे टूल्स का लाइव डेमोंस्ट्रेशन दिया और बताया कि किस तरह इनका इस्तेमाल रिसर्च के अलग-अलग स्टेज पर किया जा सकता है। सेशन में वेब ऑफ साइंस के जरिए क्वालिटी रिसर्च पेपर्स खोजने और साइटेशन ट्रैक करने की जानकारी दी गई। वहीं, एआई आधारित रिसर्च असिस्टेंट के जरिए लिटरेचर डिस्कवरी और एनालिसिस को ज्यादा आसान बनाने के तरीके बताए गए। एंडनोट के माध्यम से रेफरेंस मैनेजमेंट, रिसर्च मटेरियल को व्यवस्थित करने और रिसर्च पेपर तैयार करने की प्रक्रिया पर भी जानकारी दी गई।

इनसाइट्स के जरिए रिसर्च परफॉर्मेंस की बेंचमार्किंग, संस्थानों की रिसर्च क्षमता का आकलन,कोलैबोरेशन के अवसरों की पहचान और रिसर्च इम्पैक्ट मापने के तरीकों पर चर्चा हुई। जर्नल साइटेशन रिपोर्ट्स (जेसीआर) और जर्नल होराइजन कैटेगरी डेटा (जेएचसीडी) के जरिए जर्नल की रैंकिंग और पब्लिकेशन के लिए सही जर्नल चुनने की जानकारी भी दी गई।

वर्कशॉप की खास बात वेब ऑफ साइंस के ट्रायल एक्सेस की शुरुआत रही। कार्यक्रम के अंत में क्विज आयोजित किया गया, जिसमें टॉप पांच प्रतिभागियों को पुरस्कार दिए गए। इसके बाद हाई टी के दौरान प्रतिभागियों ने क्लैरिवेट की एक्सपर्ट के साथ रिसर्च से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।


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