
पंकज ठाकुर

बड़कागांव। बड़कागांव प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत महुँगाई कलां में मनरेगा योजनाओं में कथित अनियमितता का मामला लगातार गहराता जा रहा है। जहां एक ओर ग्रामीणों द्वारा उच्चस्तरीय जांच की मांग की जा रही है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) की प्रक्रिया, उसके प्रतिवेदन और दर्ज प्राथमिकी को लेकर भी कई विरोधाभासी तथ्य सामने आ रहे हैं। अब यह मामला केवल योजनाओं में गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहकर प्रशासनिक प्रक्रिया और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

पंचायत निवासी गुड्न सिंह उर्फ जितेंद्र कुमार सिंह द्वारा उपायुक्त, हजारीबाग को सौंपे गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि महुँगाई कलां पंचायत में मनरेगा के तहत संचालित आम बागवानी, डोभा निर्माण, कूप निर्माण जैसी योजनाएं श्रमिकों से कार्य कराने के बजाय जेसीबी मशीन से कराई गईं। इससे स्थानीय मजदूरों को रोजगार से वंचित होना पड़ा और मनरेगा अधिनियम की मूल भावना का उल्लंघन हुआ। आवेदन में फर्जी मास्टर रोल, मजदूरों की उपस्थिति के फोटो का अभाव और दलालों के माध्यम से अवैध भुगतान का भी आरोप लगाया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि 6 नवंबर 2025 को पंचायत भवन में सामाजिक अंकेक्षण के बाद आयोजित जनसुनवाई के दौरान जब इन अनियमितताओं पर सवाल उठाए गए, तो मुखिया और पंचायत सचिव द्वारा उन्हें धमकाया गया। आरोप है कि झूठे मुकदमे में फंसाने की चेतावनी दी गई और बाद में बड़कागांव थाना में प्राथमिकी दर्ज करा दी गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि पंचायत सचिव ने फोन पर दबाव में केस दर्ज कराने की बात स्वीकार की है, जिसकी रिकॉर्डिंग उपलब्ध है।
इसी बीच सामाजिक अंकेक्षण प्रतिवेदन से जुड़े तथ्य भी सामने आए हैं। प्रतिवेदन के अनुसार, अंकेक्षण अवधि 2 नवंबर 2025 से संबंधित है और इसमें दस्तावेज सत्यापन के दौरान कई तकनीकी खामियां पाई गईं। रिपोर्ट में उल्लेख है कि कम से कम दो योजनाओं में तकनीकी प्रतिवेदन प्रारूप में सहायक अभियंता (एई) और कनीय अभियंता (जेई) के हस्ताक्षर उपलब्ध नहीं थे। कुछ योजनाओं में तकनीकी स्वीकृति और अनुलग्नक संलग्न नहीं पाए गए, जिससे कार्यों की गुणवत्ता और वैधता पर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं। ग्राम सभा स्तर पर इन मुद्दों को सही मानते हुए उच्च स्तर पर अग्रसारित करने की अनुशंसा भी की गई है।
दूसरी ओर पंचायत सचिव जगन्नाथ यादव का कहना है कि वे महुँगाई कलां और गरसुल्ला पंचायत में प्रभार के रूप में कार्यरत हैं और सोशल ऑडिट के दौरान उत्पन्न विवाद की सूचना उन्हें प्रखंड विकास पदाधिकारी के माध्यम से मिली। उनके अनुसार, जिला स्रोत व्यक्ति (डीआरपी) सोशल ऑडिट यूनिट तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी के पत्र के आलोक में उन्होंने थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई। पंचायत सचिव का यह भी कहना है कि उनके संज्ञान में योजनाओं से संबंधित कई आरोप पहले नहीं थे।
इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी जितेंद्र कुमार मंडल ने बताया कि सोशल ऑडिट के दौरान ऑडिटर के साथ ग्रामीणों द्वारा गाली-गलौज और सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोप लगाया गया था। इसी आधार पर सोशल ऑडिट से जुड़े पक्ष की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई। बड़कागांव थाना कांड संख्या 266/25, दिनांक 09 नवंबर 2025 को भारतीय न्याय संहिता की धारा 132/315 के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसकी जांच पुलिस अवर निरीक्षक आशीष भगत कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सामाजिक अंकेक्षण का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, न कि सवाल उठाने वालों को डराना। उनका आरोप है कि एफआईआर का इस्तेमाल दबाव बनाने और शिकायतकर्ताओं की आवाज दबाने के लिए किया जा रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि सामाजिक अंकेक्षण प्रतिवेदन, तकनीकी रिपोर्ट, मास्टर रोल और भुगतान विवरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
अब यह मामला जिला स्तर तक पहुंच चुका है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह सामाजिक अंकेक्षण प्रतिवेदन और लगाए गए आरोपों के आधार पर निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराता है या नहीं। यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार और अविश्वास और गहराने की आशंका जताई जा रही है।
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