
*बोकारो :* दीपस्तंभ के बारे में जानकारी देते हुए अय्यप्पा सेवा संगम के अध्यक्ष राजगोपाल ने लोकल 18 से कहा कि इस दीपस्तंभ का निर्माण केरल के विशेष कारीगरों द्वारा किया गया है जिसका कुल वजन 1.5 टन है. इसे मंदिर के विशेष अवसरों पर दीप जलाने के लिए तैयार किया गया है. उन्होंने यह भी बताया कि इस दीपस्तंभ के नीचे नाग और स्तंभ के ऊपर भगवान अय्यप्पा का घोड़ा विराजमान है. जो इसके शोभा को अधिक बढ़ता है. इस दीपस्तंभ में 1008 बत्ती जलाने में 60 लीटर तेल की खपत होती है. वहीं इस पांच दिवसीय महोत्सव में शबरीमाला के मुख्य तान्त्रिवर्य ब्रह्मश्री -महेश मोहनरू कंडरु के नेतृत्व में मंदिर में पूजा किया जायेगा.

वर्ष 1983 में इस मंदिर में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी. इस मंदिर में भगवान अयप्पा के अलावा भगवान शिव, विष्णु, गणेश, कार्तिकेय, देवी भगवती, और अन्य देवी देवताओं की मूर्तियां है. इसके अलावा मंदिर की दीवार पर दशावतारों की प्रतिमा स्थापित है. जिसके दर्शन से आप शांति और सुकून महसूस करेंगे. इसके अलावा श्रद्धालु मंदिर में सुबह 5:30 से लेकर 9:30 तक और शाम 5:30 बजे से लेकर रात 8:30 बजे तक पहुंच कर दर्शन कर सकते है.

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