
समाज की पीड़ित महिलाओं को मदद मिल सके, इसके लिए सरकार ने तमाम तरह की योजनाएं चलाई हैं। इसी के तहत हजारीबाग में भी *वन स्टॉप सेंटर* संचालित है। इस सेंटर के माध्यम हिंसा से पीड़ित बालिकाओं और महिलाओं को कानूनी व मनोवैज्ञानिक परामर्श मिल सकेगा।
दरअसल, समाज में आज भी कई ऐसी बालिकाएं और महिलाएं हैं, जो किसी न किसी रूप में अपराध का शिकार बनती हैं। अगर उन्हें किसी मदद की जरूरत पड़ती है तो उनकी मदद करने वाला कोई नहीं मिलता। ऐसी महिलाओं, युवतियों और बालिकाओं को *वन स्टॉप सेंटर’* के माध्यम से मदद मुहैया कराई जाएगी। जिसमें वह जाकर अपने साथ हुई घटना का जिक्र कर सकेंगी और इसी सेंटर में पीड़िताओं को हर तरह की सलाह दी जाएगी।
इस कड़ी में आज उपायुक्त *नैंसी सहाय* की अध्यक्षता में वन स्टॉप सेंटर के संचालन एवं इसके उद्देश्यो की पूर्ति को लेकर आज समाहरणालय सभागार में टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गई। सर्वप्रथम जिला समाज कल्याण पदाधिकारी इंदू प्रभा खलखो ने विषय प्रवेश कराते हुए आज के बैठक के उद्देश्यों की जानकारी दी। तदोपरांत बैठक में बाल सुरक्षा,बाल सुधार गृह, महिला हेल्पलाइन,महिला शक्ति केन्द्र इत्यादि पर कार्य कर रही एंजेंडर हेल्थ एंड ममता एचआईएमसी एनजीओ के प्रतिनिधियों के द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तृत रूपरेखा उपायुक्त के समक्ष रखी। मौके पर डॉ मीता महेर ने महिलाओं की सुरक्षा व उनके अधिकारों की चर्चा करते हुए जेंडर बेस्ड वॉयलेंस, रेफरल पाथवे, पुलिस के साथ समन्वय, मल्टी सेक्टोरल रिस्पॉन्स आदि बिन्दुओं पर अपनी बात उपायुक्त के समक्ष रखी।
उपायुक्त ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि महिला सुरक्षा के लिए सरकार व स्थानीय प्रशासन हमेशा सजग है। महिला हिंसा को संवेदनशीलता के साथ इसके रोकथाम के लिए कदम उठाने की आवश्यकता है तथा पीड़ित महिला को दी जाने वाली सुविधाओं,अधिकारों से उन्हे लैस करने की भी जरूरत है। इसके तहत पीड़ित किशोरी व महिला कानूनी सहायता देने का प्रावधान है लेकिन जानकारी के आभाव में कई महिलाओं को उनका हक और लाभ नहीं मिल पाता। महिला बाल विकास एवं सुरक्षा के लिए जानकारी ग्रास रूट लेवल तक पहुंचे इसलिए जन जन तक जागरुकता कार्यक्रम आयोजित करें, बंद कमरों में बैठकों तक इसको सीमित न रखे। प्रचार प्रसार के सभी माध्यमों के द्वारा महिलाओं के अधिकारों सम्बंधी आवश्यक जागरुकता फैलाने की बात कही। उन्होने फिल्म, नुक्कड़ नाटक, बैनर के माध्यमों से नियमित प्रचार प्रसार करने की बात पर बल दिया। साथ ही उन्होने हजारीबाग के वन स्टॉप सेंटर के रिक्तियों को जल्द भरने का भरोसा दिलाया। उन्होने निचले स्तर पर अंतर विभागीय एवं पुलिस के साथ समन्वय के साथ कार्य करने की बात कही।
फिलहाल वन स्टॉप सेंटर सदर अस्पताल में संचालित किया जा रहा है।
*क्या होता है सखी वन स्टाप सेंटर*
सखी वन स्टाप सेंटर अनाथ, विधवा, निराश्रित महिलाओं, हिंसा से पीड़ित महिलाओं को सहारा प्रदान करता है। जिले स्तर पर पीड़िताओं को लाभ दिलाने के लिए सरकार द्वारा सखी वन स्टॉप सेंटर खोले गए हैं। जिनकी देखरेख, संचालन महिला और बाल विकास विभाग की मदद से की जाती है। वन स्टॉप सेंटर योजना भारत सरकार ने एक अप्रैल 2015 को हिंसा प्रभावित महिलाओं का समर्थन करने के लिए लागू की थी। यह योजना मूल रूप से सखी के नाम से जानी जाती है। वन स्टॉप सेंटर स्कीम का मतलब है, एक ऐसी व्यवस्था जहां हिंसा से पीड़ित कोई भी महिला मदद ले सकती है।
इस सेंटर में पीड़ित बालिका और महिलाओं को प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने की सुविधा के साथ चिकित्सीय सुविधा, मनोवैज्ञानिक परामर्श की सुविधा, कानूनी परामर्श और पांच दिन तक अस्थायी निवास की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
मौके पर बैठक में उपायुक्त के अलावा प्रशिक्षु आईएएस शताब्दी मजूमदार, डालसा के सचिव गौरव खुराना,सिविल सर्जन डॉ एस पी सिंह, डीएसपी राजीव कुमार, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राज कुमार राज,एपीआरओ परिमल कुमार,डॉ मीता महर,ममता हेल्थ इंस्टीटूट के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक राजेश रंजन,ब्रेक थ्रू से कहकसा, सृजन फाउंडेशन से पूजा , संजय कुमार, उपस्थित थे।

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