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बीसीसीएल कुसुंडा क्षेत्र सं० 6 में कोयले के उत्खनन से बढ़ा प्रदूषण, लिखित आश्वासन के बाद भी प्रदूषण रोकथाम की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं

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Sep 9, 2023

 

रिपोर्ट, अरुण कुमार सैनी

केंदुआ। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड कुसुंडा क्षेत्र संख्या 6 अंतर्गत कोयले का अंधाधुंध उत्खनन होने से आसपास के चारों चौहदी गोधर रवानी बस्ती, गोधर कुर्मीडीह बस्ती, चौहान बस्ती, गोंदूडीह, काली बस्ती, धनसार, अलकुशा , इत्यादि गांवों में प्रदूषण का स्तर दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। इससे पर्यावरण को काफी खतरा हो रहा है। इसका पूर्ण रूप से बीसीसीएल प्रबंधन और उसके अधीन कार्य कर रही आउटसोर्सिंग कंपनियां जिम्मेदार है। देश में ऊर्जा की जरूरत पूरी करने के लिए कोयला की उत्खनन जरूरी है। परंतु कोयला के उत्खनन के लिए पर्यावरण को सुरक्षित रखने वाले सभी मापदंडों का पालन भी उतना ही जरूरी है। पर लक्ष्य हासिल करने के लिए बीसीसीएल प्रबंधन व अपनी कमाई बढ़ाने के लिए कुसुंडा क्षेत्र संख्या 6 में संचालित आउटसोर्सिंग कंपनियां सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए उत्खनन कर रही है जो पर्यावरण के लिए घातक है। कोयलांचल का पर्यावरण प्रदूषित होने के चलते यहां के लोग कई प्रकार की गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। इस दिशा में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, डीजीएमएस, जिला प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन को गंभीर होने की जरूरत है। तभी यहां के सभी गांव प्रदूषण मुक्त होगा बीसीसीएल प्रबंधन नियमों को ताक पर रख आउटसोर्सिंग के माध्यम से कोयला उत्खनन करने में लगी है। कंपनी को जनता की तनिक भी चिंता नहीं है। और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए अब आम लोगों को खुद आगे आना होगा और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए पेड़ पौधों की रक्षा और उनकी देखभाल करने की सख्त जरूरत है। तभी हमारा गांव प्रदूषण मुक्त होगा। बीसीसीएल प्रबंधन लोगों के भविष्य के साथ पर्यावरण से भी खिलवाड़ कर रही है। खुली खदान के नाम पर गांवों एवं तालाबों को प्रदूषित किया जा रहा है। जिससे उनके खाने पीने की सामग्री एवं कपड़े नष्ट हो रही है। उत्खनन स्थल पर कई स्थानों पर जहरीले गैस का रिसाव भी जो ऊपर है। जबकि प्रदूषण को लेकर विगत माह गोधर कुर्मीडीह बस्ती के रैयतो द्वारा बीएल ए यूसी आउटसोर्सिंग का घंटों चक्का जाम के दौरान बीसीसीएल प्रबंधन द्वारा प्रदूषण रोकथाम का लिखित आश्वासन दी गई थी उसके बावजूद भी यहां प्रदूषण रोकथाम की कोई वैकल्पिक व्यवस्था अब तक नहीं दिख रही है। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में जन्म लेने वाले गांवों के नवजात शिशु अपंगता का शिकार हो सकते हैं जिससे यहां के ग्रामीणों को बहुत बड़ा ठेस पहुंच सकता है।


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