
*पार्क की जर्जर चहारदीवारी, टूटे झूले,बेकार हो रहे स्लाइडर, उखड़ती टाइल्स बयां कर रहे हैं इसकी बदहाली*

*धनबाद :* बिरसा मुंडा पार्क इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को विवश है. 21 एकड़ में फैले इस पार्क की खूबसूरती को ग्रहण लग चुका है. पार्क की जर्जर चहारदीवारी, टूटे झूले, सीसीटीटीवी कैमरे, बेकार हो रहे स्लाइडर, उखड़ती टाइल्स, लेजर फाउंटेन बदहाली की कहानी बयां कर रहे हैं.
नगर निगम के अफसरों को सिर्फ पार्क के टिकट की बिक्री से मतलब रह गया है. पार्क की खूबसूरती के नाम पर सिर्फ बगीचा ही बचा है. पार्क को विस्तारित करने के लिए 48 करोड़ खर्च करने की योजना भी ठंडे बस्ते में चली गई.
एक तरफ बदहाली और बदसूरती का हमला, दूसरी तरफ पार्क में प्रवेश करने के टिकट की कीमत दोगुनी. वर्ष 2007 में पार्क के अस्तित्व में आने के बाद 60 करोड़ रुपये से अधिक राशि खर्च कर इसे खूबसूरत बनाया गया. वर्ष 2016 में पार्क को जिला प्रशासन ने नगर निगम के हवाले कर दिया. इसके बाद पार्क के जीर्णोद्धार की बड़ी बड़ी घोषणाएं हुईं. परंतु हुआ कुछ नहीं. टिकट के दाम में बेतहाशा वृद्धि कर दी गई. कुछ साल पहले तक एक व्यक्ति के लिए 10 रुपये का टिकट अब 20 रुपये में मिलता है. शनिवार और रविवार के लिए अलग से 25 रुपये का रेट है. अब हर दिन का रेट 25 रुपये कर दिया है.
न पार्क की सुरक्षा, न यहां आनेवालों की सुविधा का ख्याल. पार्क से सुरक्षा गार्ड भी हटा दिया गया है. एक साल से 12 सीसीटीवी कैमरे खराब पड़े हैं. पार्क में रोमियो घूमते रहते हैं, जबकि असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है. उन्हें रोकने वाला भी कोई नहीं है. सोमवार से शुक्रवार तक 5 हजार रुपये टिकट से आते हैं, वहीं शनिवार और रविवार को 15 से 20 हजार रुपये के टिकट बिक जाते हैं. बावजूद पार्क का खस्ता हाल है.
बिरसा मुंडा पार्क प्रबंधक निवास कुंभकार स्वीकार करते हैं कि पार्क में फाउंटेन सहित कई चीजों की मरम्मत करने या बदलने की जरूरत है, निगम को पत्र लिखा गया है. लेकिन अभी तक कोई पहल नहीं हुई है.

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