
*धनबाद :* बरामद बच्चों को रखने के लिए नियोजनालय कैंपस में बनाया गया भवन जर्जर हो चुका है। करोड़ों का भवन अब कबाड़ हो गया है। बनने के बाद आज तक इसका उदघाटन ही नहीं हुआ।

स्थिति यह है कि भवन के अंदर झाड़ियां उग आई हैं। मेन गेट के आधे हिस्से तक कचरा डंप कर दिया गया है।

*चाइल्ड लाइन बंद होने के बाद गहराया संकट*
स्टेशन और जिले के अन्य क्षेत्र से बरामद लापता बच्चों को पहले कुछ दिनों तक चाइल्ड लाइन में रखने की व्यवस्था थी, लेकिन चाइल्ड लाइन के बंद होने के बाद संकट गहरा हो गया है। अब पांच मिनट भी बच्चों को रखने की कोई व्यवस्था नहीं हैं। यहां बरामद बच्चों को बोकारो के सहयोग विलेज में रखा जा रहा है।
*बोकारो ले जाने के लिए फेंका- फेंकी*
बरामद हुए बच्चों को सीडब्ल्यूसी में प्रस्तुत करने के बाद तत्काल बोकारो स्थित सहयोग विलेज ले जाना पड़ता है, जहां उन्हें आवासित किया जाता है। पहले यह काम चाइल्ड लाइन के माध्यम से होता था। अब फेंकाफेंकी की स्थिति है। जो एजेंसी बच्चों को बरामद करती है, उसे ही बोकारो पहुंचाना पड़ता है। यही स्थिति रही तो रेल पुलिस, आरपीएफ या फिर जिला पुलिस बच्चों की बरामदगी में कोताही बरतेगी।
*लड़कियों व नवजात के लिए निजी एजेंसी*
फिलहाल धनबाद में लड़कियों और नवजात के लिए एक निजी एजेंसी है। सरायढेला स्थित बाल उपवन में फिलहाल लड़कियों और नवजात को रखा जाता है, लेकिन लड़कों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
*प्लेस ऑफ सेफ्टी की योजना भी ठंडे बस्ते में*
नियोजनालप कैंपस में ही प्लेस ऑफ सेफ्टी को भवन बनना था। प्रस्ताव के अनुसार यहां संप्रेक्षण गृह के सजायाफ्ता बच्चों को यहां रखना था। अक्सर भूदा स्थित बाल संप्रेक्षण गृह और सुधार गृह के बच्चों के बीच झड़प की खबर को लेकर दोनों को अलग करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था।
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