
धनबाद | तो क्या बिहार से झारखंड होकर बंगाल तक गोवंश तस्करी का सेंटर पॉइंट बन गया है, धनबाद से गुजरने वाला जीटी रोड. यह सवाल हम नहीं उठा रहे है बल्कि धनबाद के लोगों की जुबानी है. हाल की घटनाएं भी इसी की पुष्टि करती है. धनबाद ज़िले में पड़ने वाले जीटी रोड से क्या अब कोई ऐसा सामान नहीं बचेगा, जिसकी तस्करी नहीं की जाएगी. तस्करी चाहे कोयले का हो , बालू का हो ,लोहा का हो, सबकी तस्करी तो होती ही है, लेकिन तेज रफ्तार में पशु तस्करी हो रही है, और इसका सिंडिकेट बिहार से लेकर झारखंड और झारखंड से लेकर बंगाल तक कम कर रहा है. यह तीनों राज्यों के लिए बहुत बड़ी चुनौती है. मांगुर मछली की तस्करी तो जगजाहिर है.

कंटेनर बन गया है सबसे सुरक्षित वाहन

लेकिन पशु तस्करी और जिस हालत में गोवंश को ठूंस कर ले जाया जाता है, देखने वालों का कलेजा भी कांप जाता है. जीटी रोड पर अब तो हद हो गई है. बरवाअड्डा में कंटेनर में लदे पशु पकड़ाने का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि जीटी रोड पर तोपचांची के पास रविवार को सुबह गो वंश लगा एक कंटेनर फिर पकड़ा गया. उसमें ठूंस ठूंस कर 40 मवेशियों को ले जाया जा रहा था. सूत्र बताते हैं कि कंटेनर का किस्त फेल था. रिकवरी एजेंट ने जब उसे रोकने की कोशिश की तो चालक तेज गति से वाहन भगाने लगा. इसके बाद रिकवरी एजेंटो ने रगेदकर वाहन को पकड़ा. उसके बाद चालक और खलासी भागने लगे.
कंटेनर में 25 पशु मृत मिले
इस पर ग्रामीणों ने दोनों को खदेड़कर पकड़ लिया. फिर दोनों को तोपचांची थाना लाया गया. इसके बाद उसे कतरास गौशाला ले जाया गया तो उसमें 25 पशु मृत मिले. जीवित गोवंशों को गौशाला में रखा गया है. आशंका व्यक्त की जा रही है कि कंटेनर में ठूंसने और लंबे समय तक बंद रहने और भूख- प्यास के कारण 25 गोवंश की मौत हुई होगी. कंटेनर को बिहार से नेशनल हाईवे के रास्ते बंगाल ले जाया जा रहा था. गोवंश तस्करी के लिए कंटेनर सबसे अधिक सुरक्षित वाहन बन गए है. स्थानीय लोगों की माने तो जीटी रोड पर प्रतिदिन गोवंश लगे कंटेनर गुजरते है. चारों तरफ से बंद रहने के कारण बाहर से कुछ दिखता भी नहीं है. कंटेनर के ऊपरी हिस्से को काट दिया जाता है ताकि अंदर रखे गोवंशों को हवा मिल सके. जीटी रोड के रास्ते गोवंश लदे वाहनों के पासिंग के लिए कोड भी निर्गत किये जाते है.
20 सितंबर को भी जीटी रोड के बरवाअड्डा में पकड़ाया था मामला
20 सितंबर को भी जीटी रोड के बरवाअड्डा में गोवंश लगे कंटेनर को पकड़ा गया था. कंटेनर में 100 से अधिक गोवंश ठूंसे हुए थे. सवाल उठता है कि धनबाद जिले के इतने थानों को पार कर गोवंश लदे कंटेनर बंगाल सीमा में प्रवेश करते हैं तो क्या धनबाद पुलिस को इसकी कानों कान खबर नहीं लगती है. इससे पहले की अगर बात की जाए तो बिहार से चले वाहनों को धनबाद सीमा में प्रवेश करने के पहले क्या किसी थाने को जानकारी नहीं होती. या फिर यह सब मिलीभगत से चलता है. धनबाद जिले में तो कीमती गाड़ियों से भी गो तस्करी का खुलासा हो चूका है. गोवंश लाद कर वाहन जहां से चलते हैं और जहां उनका पहुंचना होता है, इसके बीच सैकड़ो थाने पड़ते होंगे. क्या इन सब थानों को सुविधा शुल्क मिलती है. अथवा इनके मुखबिर इतने अधिक कमजोर हो गए हैं कि इन्हें कोई सूचना ही नहीं होती.
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