
अंतर्कथा : बरही/पंचम पाण्डेय

बिहार में गया के पास गेहलौर गाँव में जन्में माउंटेन मेन दशरथ मांझी के गाँव का भर्मण बरही हज़ारीबाग रोड स्थित दी आर्य भट्ट इंस्टीट्यूट ऑफ आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस के शिक्षकों ने किया। इस दौरान उनके गंतव्य स्थान पहुंच कर उनके समाधि को नमन कर श्रधांजलि दिया। साथ ही साथ दसरथ मांझी के घर गए जहाँ पर दशरथ मांझी के नातीनपुतो से मुलाकात हुई। दी आर्य भट्ट परिवार के शिक्षकों ने सामूहिक रूप से पुष्पगुच्छ दे कर समानित किया। कुछ पल उनके निवास स्थान पर बिता कर परिवार वालों से बात कर के उनके जीवनी को नज़दीक से अनुभव किया। संस्थान के संचालक अरुण शर्मा ने दशरथ मांझी को याद करते हुए कहे कि अगर मन में कुछ पाने एवं कुछ नया करने का जुनून हो तो दशरथ मांझी से हमें सिख लेनी चाहिए। उनकी पत्नी की मृत्यु के बाद उन्होंने एक ऊंचे पहाड़ को ललकार कर कहा कि जब तक तोड़ेंगे नही तब तक छोड़ेंगे नहीं। उनके इस कार्य मे 22 साल का समय लगा। बहुत सारी चुनोतियाँ आई किन्तु वो घबराए नहीं एवं दृढ़ संकल्पित हो कर अपने लक्ष्य को पूरा किए। संस्थान के उप संचालक अधिवक्ता कुंदन कुमार ने कहा कि दशरथ मांझी का जन्म 14 जनवरी 1929 को हुई एवं उनकी मृत्यु 17 अगस्त 2007 को हुई। इसके बीच की जीवन यात्रा में माउंटेन मेन दशरथ मांझी ने सामाजिक कुरीतियों को झेलते हुए एक इतिहास रचें है। एवं आज के युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। दी आर्य भट्ट परिवार के सदस्यों ने अपनी अनुभव साझा करते हुए नीतू यादव ने कहा कि इंसान को ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण करना चाहिए एवं उनसे जुड़े रहना चाहिए। और हमलोगों के लिए ये बहुत ही सौभाग्य की बात है कि जिस महापुरुष के बारे में हमने पढ़ा एवं सुना उस स्थल पर आ कर एक अलग सी अनुभव एवं खुशी प्राप्त हुई। रमेश महतो ने कहा कि निश्चित ही हमें ऐसे दृढ संकल्पित व्यक्त्वि के बारे में जानना चाहिए एवं उनके जीवनी से हमें जीवन की नई लेसन सीखनी चाहिए। रूपा प्रजापति ने कहा कि 1959 में दशरथ मांझी की पत्नी फाल्गुनी देवी जब इनके लिए खाना-पीना ले कर पहाड़ के रास्ते जा रही थी,उसी वक्त उनका पेर फिसल कर गिर जाने से देहांत हो जाने के कारण वो सोचे कि जिस घटना से हम गुजरे है कोई और परिवार ने गुजरे। सिमा यादव ने कहा कि दशरथ मांझी के गाँव को भ्रमण करने के बाद यह पता चला कि इस गाँव मे विकास हुई है तो सिर्फ सड़क की विकास हुई है जबकि आज भी यहाँ के परिवार बहुत सारी चीज़ों से वंचित है। जबकि बहुत सारी फ़िल्म एवं डॉक्यूमेंट्री इनपर बनाई गई किन्तु उस कमाई से गाँव का विकास किया जा सकता था किंतु कुछ अभाव दिखता है।

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