
रिपोर्टर सूरज पासवान

झरिया: मकर संक्रांति को लेकर झरिया का तिलकुट बाजार गुलजार है। दुकानों में कारीगर पूरे दिन तिलकुट तै यार कर रहे हैं। मकर संक्रांति के दिन सामान कम न पड़ जाए, इसलिए ज्यादा मात्रा में स्टॉक तैयार किया जा रहा है। लोगों ने भी खरीदारी शुरू कर दी है। व्यवसायी अतिरिक्त कारीगर लगाकर तिलकुट बनवा रहे हैं। वैसे तो यहां सालों भर तिलकुट की ब्रिकी होती है, लेकिन सर्द मौसम आते ही इसकी मांग बढ़ जाती है। जनवरी माह में तिलकुट की मांग बढ़ते ही धम-धम की आवाज और सोंधी महक से शहर गुलजार हो गया है। यह किसी फैक्ट्री या किसी अन्य मशीनों की आवाज नहीं होती है, बल्कि हाथ से तिलकुट कुटने की आवाज होती है। तिलकुट को मकरसंक्रांति का प्रमुख मिष्ठान के रूप में जाना जाता है। आगामी 14 जनवरी को मकर संक्रांति का त्योहार है। इस दिन तिलकुट खाने का धार्मिक प्रावधान होता है। इसे लेकर झरिया शहर का तिलकुट बिक्री के लिए माने जाने वाला झरिया के कोयरीबन्ध स्थित दुर्गा तिलकूट में बिहार के गया से आए कारीगरों द्वारा तिलकूट बनाने का काम जोरों से जारी है। वैसे तो तिलकुट झरिया शहर के जगहों में बनाया जाता है। लेकिन दुर्गा ब्रांड नामक तिलकुट यहाँ के लोगों मे खासा लोकप्रिय है। दुर्गा तिलकूट के मालिक संजीत गुप्ता ने बताया कि तिलकुट बनाने का काम नवंबर से शुरू हो जाता है। मकर संक्रांति को लेकर गया से कारीगरों को बुलाया जाता है। इस बार शुगर फ्री तिलकुट की ज्यादा डिमांड है। खोवा व सफे दतिल का तिलकुट ग्राहक सबसे अधिक पसंद करते हैं। गुड़ वाली तिलकुट के अलावा गजक भी लोगों को काफी पसंद है।

बाइट: दुर्गा तिलकूट के मालिक संजीत गुप्ता
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