
डुमरी:मैं अकेला ही चला था,जानिबे मंजिल मगर,लोग आते गए और कारवां बनता गया.सिक्खों के पहले गुरु और सिक्ख पंथ के संस्थापक गुरुनानक देव उपरोक्त पंक्तियों को चरितार्थ करने वाले महान शख्सियतों में एक थे.

पीएनडी जैन उच्च विद्यालय में नानक जयंती का आयोजन प्रधानाध्यापक सुनील कुमार जैन की अध्यक्षता में आयोजित की गयी.धर्म में फैली हुई कुरीतियों और आडम्बरों को अकेले अपने दम पर दूर करने का बीड़ा उठाने वाले गुरुनानक देव किसी धर्म या जाति विशेष के आराध्य नहीं है वरन गुरु की तलाश में भटकने वाले हर व्यक्ति के लिए पूजनीय है और पथ-प्रदर्शक हैं,उक्त बातें हिन्दी शिक्षक डाॅ.श्याम कुमार सिंह ने कही.शिक्षक प्रतिनिधि कृष्ण कुमार सिंह ने इन गुरुओं से अपने जीवन में सुधार लाने की अपील की.प्रधानाध्यापक सुनील कुमार जैन,शिक्षक देवेश कुमार देव इत्यादि ने अपने विचार रखे.पवन, अनामिका,विकास आदि कई विद्यार्थियों ने गुरु के जीवनी पर प्रकाश डाला.कार्यक्रम में सदानंद प्रसाद, संगीता जैन,प्रमोद कुमार यादव,माधुरी कुमारी,रजत जैन,रुपलाल प्रसाद मंडल,सुब्रत कुमार सामंत,दयानंद कुमार ,डाॅ.विवेक जैन,वैभव रानी आदि उपस्थित थे।

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