
*इटखोरी :* झारखंड के चतरा जिला स्थित इटखोरी प्रखंड के भद्रकाली मंदिर में विश्व शांति की कामना के लिए लगातार 21 साल से अखंड संकीर्तन चल रहा है। यह अनोखी आस्था देश और दुनिया के लिए अलग है। इस अखंड संकीर्तन की शुरुआत 21 सितंबर 2002 में पुरी के नए मठ के पीठाधीश सह चई समाज के गुरु स्वामी श्यामानंद जी महाराज, पूर्व विधायक बाबू निरंजन प्रसाद सिंह तथा दिवंगत बाबू रामसेवक प्रसाद सिंह ने की थी।

इसके बाद जैसे-जैसे समय बीतता गया, संकीर्तन कार्यक्रम में लोगों की आस्था बढ़ती गई। आज करीब 80 गांव के लोग इस कार्यक्रम से जुड़े हैं। वर्तमान में इस अखंड संकीर्तन कार्यक्रम को शिवसेवक सिंह संभाल रहे हैं।

*दिव्यांगों और वृद्वों के लिए बनाया गया आश्रय स्थल*
अखंड संकीर्तन में भाग लेनेवाले दिव्यांगों और घर से उपेक्षित किये गये बुजुर्गों के लिए यह एक आश्रय बन गया है। सभी लोग सुबह से लेकर शाम तक राम भजन कर खुशहाल हैं। बतौर सहयोग राशि के रूप में कीर्तन में लगातार शामिल होने वाले लोगों को डेढ़ हजार की राशि प्रदान की जाती है। साथ ही तीनों समय का भोजन दिया जाता है। इनके रहने की भी व्यवस्था वहीं कर दी गई है। संकीर्तन की सफलता के लिए चार शिफ्ट बनाए गए हैं। दिव्यांगों में धीरन पांडेय, मनोज चौधरी, आशीष तिवारी, चलितर राणा, गिरधारी, दयाल, लक्ष्मी, बृजु, किशोरी समेत कई लोग शामिल हैं। उपरोक्त लोगों के अलावा अन्य श्रद्धालु भी इस कार्यक्रम में अपने स्वेच्छा से हिस्सा लेते हैं।
*पर्यावरण भी है सुरक्षित*
अखंड संकीर्तन के माध्यम से उक्त परिसर में पेड़-पौधे सुरक्षित हैं। तकरीबन 30 एकड़ में लगे पेड़ पौधे पूरी तरह से गुलजार हैं। संकीर्तन करने वाले लोग पेड़ पौधों की पूरी रखवाली करते हैं। यहां गो-पालन की भी व्यवस्था है। यहां कई साल से संकीर्तन कार्यक्रम अस्थाई मंडप में चल रहा था। जब दानदाता मदद के लिए आगे आए तो बीच में रैयत लोग बाधा डालने लगे। मगर कई साल के बाद वर्ष 2018 में यहां एक स्थाई मंडप का निर्माण कराया गया। इस मंडप में माता जानकी, प्रभु श्रीराम और हनुमान की प्रतिमा स्थापित है। इसी मंडप में फिलहाल अखंड संकीर्तन का कार्यक्रम चल रहा है।
*वर्षगांठ के मौके पर उमड़ती है भारी भीड़*
21 सितंबर को हर साल अखंड संकीर्तन कार्यक्रम की वर्षगांठ मनायी जाती है। इस मौके पर भक्तों का काफी जुटान होता है। इसमें चतरा के अलावा हजारीबाग, गिरिडीह, रांची, कोडरमा और धनबाद के अलावा बिहार के भी लोग पहुंचते हैं। सबसे बड़ी बात है कि इसी दिन साल भर का लेखा-जोखा होता है और खूबी और खामियां भी गिनाई जाती हैं। वैसे प्रत्येक शनिवार को भी साप्ताहिक बैठक में अहम मुद्दों पर चर्चा की जाती है।
*महायज्ञ की भी संभाल रखी है जिम्मेदारी*
संकीर्तन मंडल के तत्वावधान में भद्रकाली में आयोजित महायज्ञ कार्यक्रम भी हो रहा है। यह महायज्ञ स्वामी श्यामानंद जी महाराज के सानिध्य में विश्व शांति के लिए कई दशक से किया जा रहा है। महायज्ञ हर साल नौ दिनों तक चलता है। इसका झंडा मकर संक्राति के दिन गाड़ा जाता है।
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