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चांडिल में विशाल ‘गजराज’ की दस्तक, दहशत में आधा दर्जन गाँव; दलमा गज परियोजना पर उठे सवाल

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Dec 18, 2025
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चांडिल वन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली लूपुंगडीह पंचायत में एक बार फिर मानव-हाथी संघर्ष की आहट ने ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा दी है। गुरुवार शाम करीब 4 बजे, बाना जंगल की तराई में दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी का एक विशालकाय टस्कर (गजराज) विचरण करता देखा गया। हाथी की मौजूदगी की खबर फैलते ही बाना, पितकी, चिगड़ीडीह और बंधार गाँवों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गजराज जामबाद जंगल से उतरकर धीरे-धीरे रिहाइशी इलाकों की ओर बढ़ रहा है।

भोजन की कमी और बदलता कॉरिडोर सूत्रों के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में इस क्षेत्र में हाथियों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि ‘दलमा गज परियोजना’ के तहत हाथियों के लिए उनके प्राकृतिक आवास में पर्याप्त भोजन उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि हाथियों का झुंड अब ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र (चांडिल, नीमडीह और लूपुंगडीह) को अपना नया ठिकाना बना रहा है। यहाँ खेतों में खड़ी फसलों के कारण हाथी अक्सर गाँवों का रुख कर रहे हैं।

सरकारी योजनाओं पर जनता का आक्रोश ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार के प्रति कड़ा रोष व्यक्त किया है। ग्रामीणों का कहना है कि, “सरकार वन्यजीवों और वनों की सुरक्षा के लिए हर साल करोड़ों रुपये आवंटित करती है, लेकिन धरातल पर न तो हाथी सुरक्षित हैं और न ही इंसान। भोजन के अभाव में हाथी हमारे खेतों को निशाना बना रहे हैं और सरकार की योजनाएं केवल फाइलों तक सीमित हैं।” गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व ही चातरमा गाँव के पास एक टस्कर की दर्दनाक मौत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वन विभाग की प्रतिक्रिया मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हाथियों के इस विस्थापन (प्रवास) के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। विभाग का दावा है कि हाथियों के लिए भोजन की कमी को दूर करने के लिए अतिरिक्त उपायों पर काम शुरू कर दिया गया है।

राजनीतिक दृष्टिकोण से भी ईचागढ़ का यह क्षेत्र हमेशा से चर्चा में रहा है, और अब हाथियों का यह मुद्दा आगामी समय में एक बड़ा राजनीतिक रुख ले सकता है। फिलहाल, वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने और जंगल की ओर न जाने की चेतावनी जारी की है।

 

 


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