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चांडिल डैम विस्थापितों का आरोप: 40 साल से शोषण, 25 कर्मियों पर जांच की मांग

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May 23, 2026
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सरायकेला : ईचागढ़ निवासी विवेक सिंह बाबू विवेक सिंह बाबू ,विस्थापित /सचिव (चांडिल डैम विस्थापित संघर्ष समिति ईचागढ़ विधान सभा)

द्वारा चांडिल बहुद्देशीय परियोजना के पुनर्वास कार्यालयों में व्याप्त कथित दलाली और आय से अधिक संपत्ति को लेकर उपायुक्त को सौंपे गए आवेदन में 25 कर्मचारियों के नाम शामिल किए गए हैं।

 

*आवेदन में नामजद कर्मचारी/सेवानिवृत्त कर्मी*

विवेक सिंह के अनुसार, पुनर्वास कार्यालय संख्या-2 चांडिल, डैम डिवीजन-2, भू-अर्जन कार्यालय आदित्यपुर समेत विभिन्न कार्यालयों में पदस्थापित/सेवानिवृत्त निम्न कर्मियों पर विस्थापितों के शोषण का आरोप है:

चांडिल पुनर्वास कार्यालय में दलाली और आय से अधिक संपत्ति का आरोप, जांच की मांग।

 

*उपायुक्त को दिया आवेदन*

विवेक सिंह ने उपायुक्त सरायकेला-खरसावां को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि चांडिल डैम जलाशय से प्रभावित 84 मौजा 116 गांव के विस्थापितों के पुनर्वास कार्यालय संख्या-2 चांडिल में कुछ कर्मचारी एवं अन्य कार्यालयों से प्रतिनियुक्त कर्मी विस्थापितों का शोषण कर रहे हैं।

 

*आवेदन में इन नामों का उल्लेख*

आवेदन के अनुसार, कथित रूप से दलाली में संलिप्त कर्मचारियों के नाम इस प्रकार हैं:

 

1. दारा प्रसाद मंडल – पुनर्वास कार्यालय संख्या-2, चांडिल

2. उत्तम पांडे – पुनर्वास कार्यालय संख्या-2, चांडिल

3. बादल बनर्जी – भू-अर्जन कार्यालय, आदित्यपुर

4. प्रसेनजीत घोष – अपर निदेशक कार्यालय, आदित्यपुर जमशेदपुर

5. सेवानिवृत्त दिलीप चटर्जी – पुनर्वास कार्यालय संख्या-1, आदित्यपुर जमशेदपुर

6. सेवानिवृत्त तपन कुमार हाजरा – पुनर्वास कार्यालय संख्या-1, आदित्यपुर जमशेदपुर

7. शम्भू कालिंदी – पुनर्वास कार्यालय संख्या-2, चांडिल

8. लक्ष्मी महतो – पुनर्वास कार्यालय संख्या-2, चांडिल

9. भीम घाटवाल – डैम डिवीजन-2, चांडिल

10. नारायण गोप – पुनर्वास कार्यालय संख्या-2, चांडिल

11. जानिक महतो – पुनर्वास कार्यालय संख्या-2, चांडिल

12. सिदम महतो – पुनर्वास कार्यालय संख्या-2, चांडिल

13. बेचाराम सिंह मुंडा – पुनर्वास कार्यालय संख्या-2, चांडिल

14. किरिटी महतो – डिवीजन सरायकेला

15. सोनू महतो – डैम डिवीजन-2, चांडिल

16. सुधीर महतो – सुवर्णरेखा कार्यालय, आदित्यपुर

17. निवारण महतो – डैम डिवीजन-2, चांडिल

18. ब्रज गोराई – डिवीजन साकची, जमशेदपुर

19. बीरेन प्रमाणिक – भू-अर्जन/पुनर्वास कार्यालय संख्या-2, चांडिल

20. नागेंद्र प्रमाणिक – Ex पुनर्वास कार्यालय संख्या-2, चांडिल

21. सेवानिवृत्त हेमन्त प्रमाणिक – पुनर्वास कार्यालय संख्या-2, चांडिल

22. सेवानिवृत्त खलील अंसारी – पुनर्वास कार्यालय संख्या-1, 2 चांडिल, आदित्यपुर

23. सेवानिवृत्त पंचानन कुम्हार – पुनर्वास कार्यालय संख्या-2, चांडिल

24. सेवानिवृत्त नारद महतो – पुनर्वास कार्यालय-1, गांगूडीह

25. सेवानिवृत्त रमाकांत दास – पुनर्वास कार्यालय संख्या-2, चांडिल

 

इसके पूर्व आवेदन में दारा प्रसाद मंडल, उत्तम पांडे, बादल बनर्जी समेत 9 अन्य नाम भी शामिल थे।

 

*आवेदक के मुख्य आरोप*

विवेक सिंह का आरोप है कि इन “सक्रिय कर्मचारी दलालों” द्वारा शुरू से अब तक धांधली, भ्रष्टाचार, लूट और फर्जीवाड़े के कारण चांडिल डैम जलाशय के 84 मौजा 116 गांव के विस्थापितों का लगातार शोषण हो रहा है।

 

आरोप है कि मुआवजा भुगतान, प्लॉट आवंटन, नौकरी, पुनर्वास प्रमाण-पत्र आदि कार्यों के लिए विस्थापितों से अवैध वसूली की जाती है। दलालों के कारण वास्तविक लाभुक 40 वर्षों बाद भी अधिकार से वंचित हैं।

 

*जांच की मांग*

1. निगरानी/एसीबी से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच हो।

2. सभी नामजद वर्तमान एवं सेवानिवृत्त कर्मियों की आय से अधिक संपत्ति की जांच हो।

3. पुनर्वास कार्यालयों में बायोमेट्रिक हाजिरी और सीसीटीवी अनिवार्य किया जाए।

4. 84 मौजा के विस्थापितों का विशेष कैंप लगाकर लंबित दावों का निष्पादन हो।

 

*प्रशासन का पक्ष*

जिला प्रशासन के एक वरीय पदाधिकारी ने बताया कि “शिकायत प्राप्त हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए तथ्यों का सत्यापन कराया जा रहा है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

 

ईचागढ़ निवासी विवेक सिंह बाबू ने चांडिल बहुद्देशीय परियोजना अंतर्गत चांडिल डैम जलाशय के विस्थापितों के पुनर्वास से जुड़े कार्यालयों में कथित दलाली और आय से अधिक संपत्ति के मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

 

चांडिल डैम विस्थापितों ने लगाए गंभीर आरोप – “3 अधिकारियों की सांठगांठ से रुका पुनर्वास” विवेक सिंह का दावा: 25 कर्मियों की मिलीभगत से 84 मौजा के लोग 40 साल से परेशान ।

*आवेदन में नामजद 3 मुख्य नाम*

विवेक सिंह ने आरोप लगाया है कि विभागीय पुनर्वास नीति और नियम-कानून की अनदेखी कर “अपना मनचाहा राज” चलाने में ये तीन लोग शुरू से मुख्य भूमिका में रहे हैं:

1. *श्री दारा प्रसाद मंडल* – पुनर्वास कार्यालय संख्या-2, चांडिल

2. *प्रसेनजीत घोष* – अपर निदेशक कार्यालय, आदित्यपुर जमशेदपुर

3. *बादल बनर्जी* – विशेष भू-अर्जन कार्यालय, चांडिल

 

आवेदक का दावा है कि इन तीनों की “सेटिंग-गेटिंग” के कारण विस्थापितों के सारे काम रुके हुए हैं।

 

*”विस्थापित खुद काम नहीं करा सकते” – आरोप*

आवेदन के अनुसार, विस्थापित जब अपना काम कराने कार्यालय जाते हैं तो तरह-तरह के बहाने बनाकर उन्हें लौटा दिया जाता है। “केवल विस्थापित के नाम पर दलाल-एजेंट के माध्यम से आधा शेयर देकर ही काम कराया जा सकता है। हर गांव से ‘मक्केल’ एकत्रित कर ऑफिस भेजने का टेंडर इन दलालों के पास है,” विवेक सिंह ने आरोप लगाया।

 

उन्होंने आगे कहा कि इन “सक्रिय कर्मचारी दलालों” द्वारा शुरू से अब तक की गई कथित धांधली, भ्रष्टाचार, लूट और फर्जीवाड़े के कारण 84 मौजा 116 गांव के विस्थापित लगातार शोषण झेल रहे हैं।

 

*अन्य नामजद कर्मी*

आवेदन में सेवानिवृत्त पंचानन कुम्हार, सेवानिवृत्त नारद महतो, सेवानिवृत्त रमाकांत दास समेत कुल 25 नाम शामिल हैं, जो पुनर्वास कार्यालय संख्या-1, 2 चांडिल, गांगूडीह, डैम डिवीजन-2, साकची डिवीजन आदि में पदस्थापित/सेवानिवृत्त हैं।

 

*विस्थापितों की मांग*

1. निगरानी ब्यूरो से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो।

2. नामजद सभी कर्मियों की चल-अचल संपत्ति की जांच कर आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज हो।

3. पुनर्वास कार्यालय में विस्थापितों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम और हेल्प डेस्क बने।

4. 40 साल से लंबित सभी दावों के निष्पादन के लिए टाइम-बाउंड कैंप लगे।


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