
*मुंबई :* बॉलीवुड के बेहतरीन गानों की बात हो तो सबसे पहले गायक मुकेश का नाम याद आता है। आज महान सिंगर का 100 वां जन्मदिन है। बॉलीवुड की सफलता के पीछे बड़ा हाथ यहां बनने वाली फिल्मों के गानों की होती है। इसलिए पुराने समय से आज तक यहां फिल्म का हीरो जितना जरूरी होता है उतना ही यह भी जरूरी होता है कि गाने कौन गा रहा है, म्यूजिक किसका है। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के गोल्डन ईरा माने जाने वाले 60 से 80 के दशक में मुकेश, रफी और किशोर का दबदबा था। लेकिन इनमें भी सेंटिमेंटल सॉन्ग्स में मुकेश का कोई सानी नहीं था। आज भी देश-दुनिया में म्यूजिक लवर्स मुकेश के गानों को गुनगुनाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मुकेश ने कभी संगीत की कोई औपचारिक शिक्षा हासिल नहीं की, बल्कि शौकिया तौर पर बड़े सिंगर्स को गुनगुनाते-गुनगुनाते एक दिन वह फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंच गए।

*बहन की शादी ने बदल दी किस्मत*

आपको बता दें कि सिंगर मुकेश का पूरा नाम मुकेश चंद्र माथुर था। उनका जन्म 22 जुलाई 1923 को दिल्ली में हुआ था। उनके पिता लाला जोरावर चंद माथुर और मां चांद रानी थे, जिनकी 10 संतानों में से मुकेश नंबर 7 पर थे। कई साल पहले बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में सिंगर मुकेश के छोटे भाई पी डी माथुर ने बताया था, “हमारी बहन सुंदर प्यारी की शादी थी। जिसमें बहन के ससुर के चचेरे भाई व फिल्म अभिनेता मोती लाल भी बारात में आए थे। उनके साथ उनके करीबी दोस्त फ़िल्म निर्माता तारा हरीश भी थे।” उन्होंने बताया कि मुकेश उस समय केएल सैगल की आवाज को काफी अच्छे से कॉपी करते थे तो लोगों ने उनसे कुछ सुनाने को कहा। जिसके बाद मुकेश की किस्मत का सबसे बड़ा मोड़ आया।
पीडी माथुर ने आगे बताया, “जब गाने के लिए भाई मुकेश को खड़ा कर दिया गया तो उनके गाने सुन मोती लाल और तारा हरीश बहुत प्रभावित हुए। यह तब की बात है कि मुकेश मैट्रिक करके दिल्ली में ही सीपीडब्लूडी में सर्वेयर की नौकरी कर रहे थे। शादी के सात-आठ महीने बाद मोती लाल का तार आया कि मुंबई आ जाओ।”
*राज कपूर ने कहा था मुकेश को अपनी आत्मा*
मुकेश ने दिल जलता है तो जलने दे, आवारा हूं, ओ मेहबूबा जैसे हर तरह के सैकड़ों सुपरहिट गाने दिए। लेकिन मुकेश और राज कपूर के गानों की कोई मिसाल नहीं। यही वजह थी कि राज कपूर ने कहा था कि मैं अगर शरीर हूं तो मुकेश मेरी आत्मा।
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