
*धनबाद :* धनबाद में सात लाख में फुटपाथ बेच दिया गया। ये सुनकर आप चौंक गए होंगे। भला फुटपाथ कौन और कैसे बेच सकता है, लेकिन सच्चाई यही है। धनबाद नगर निगम क्षेत्र में जिसे जहां मौका मिला, उसने उस इलाके के फुटपाथ का सौदा कर दुकान लगवा दी।
*पैदल चलने वाले फुटपाथ की जगह सड़क पर आ गए।*
बैंक मोड़, ओजोन गैलेरिया सरायढेला, सिटी सेंटर, हीरापुर, पूजा टाकीज से रांगाटांड़, स्टेशन रोड, पार्क मार्केट हटिया, पुलिस लाइन से आइएसएम गेट और सरायढेला, इन सभी जगह फुटपाथ दो से तीन हजार रुपये में बिक चुके हैं। इन्हें बेचने वाले स्थानीय दबंग तो कहीं-कहीं तो स्वयं नगर निगम के कर्मी भी संलिप्त हैं।
*दो हजार से तीन हजार प्रतिमाह पर कर रहे वसूली*
इन सभी इलाकों में इस समय फुटपाथ पर 330 स्थाई और अस्थाई दुकानों ने कब्जा कर लिया गया है। कहीं प्रतिदिन तो कहीं प्रतिमाह की दर से अवैध वसूली हो रही है। प्रतिदिन के हिसाब से 40 से 80 रुपये और प्रतिमाह की बात करें तो यह दो से तीन हजार रुपये है।
ओजोन गैलेरिया सरायढेला, बैंक मोड़, पुराना बाजार और पार्क मार्केट हटिया में तो चार हजार रुपये प्रतिमाह तक की वसूली हो रही है। इन सभी जगह से औसतन दो हजार रुपये महीना भी अवैध वसूली होती है तो यह राशि सात लाख रुपये से अधिक हो जाती है।
ऐसा नहीं है कि इसकी भनक नगर निगम को नहीं है। निगम के भी कुछ निचले स्तर के कर्मी इस अवैध वसूली में लगे हैं। पूजा टाकीज से रांगाटांड़ में सड़क के दोनों ओर फुटपाथ पर स्थाई दुकानें लग गई हैं। होटल, बाइक रिपेयरिंग के साथ-साथ किराने की दुकान भी खुल गई है। पूछने पर इन दुकानदारों ने बताया कि निगम का ही कर्मचारी हर माह किराया लेकर जाता है।
*पूजा टॉकीज से रांगाटांड़ तक फुटपाथ पर 11 स्थाई दुकान*
पूजा टॉकीज से रांगाटांड़ तक फुटपाथ के दोनों ओर से 11 स्थाई दुकानें हैं। ये सभी फुटपाथ पर स्थाई तौर पर बने हैं। इनके संचालकों का कहना है कि निगम को किराया देते हैं। कोई कर्मचारी है, हर महीने 400 से 700 रुपये किराया ले जाता है। उन्होंने किराया वसूलने वाले का नाम नहीं बताया। होटल समेत अन्य दुकानों की वजह से यहां अक्सर गाड़ियां सड़क पर खड़ी रहती हैं। इनसे जाम लगता है और दुर्घटना की संभावना बनी रहती है।
*सिटी सेंटर से बरटांड़ तक 125 दुकानदारों ने कराया पक्का निर्माण*
सिटी सेंटर से बरटांड़ सीएमआरआइ तक सड़क के दोनों ओर 310 दुकानें हैं। इनमें से 135 दुकानें ऐसी हैं, जिन्होंने पक्का निर्माण कर फुटपाथ को अपनी दुकान में मिला लिया है। किसी ने सीढ़ी बना दी, तो किसी ने पक्की ढलाई कर टेबल-कुर्सी रख लिया है। 40 दुकानदार ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी दुकान के आगे सड़क की जगह अपनी मानकर ठेला-खोमचा वालों को किराए पर दे दिया है। इनसे प्रतिदिन 80 से 100 रुपये वसूल रहे हैं।
*रणधीर वर्मा चौक से सरायढेला तक अतिक्रमण का बोलबाला*
रणधीर वर्मा चौक से पुलिस लाइन होते हुए सरायढेला तक अतिक्रमण का बोलबाला है। पार्क मार्केट से पुलिस लाइन की ओर से बढ़ने पर टायर दुकानदार अपनी दुकान से बाहर निकलकर फुटपाथ नहीं बल्कि सड़क पर टायर बेच रहे हैं। इस सड़क पर आधा दर्जन बाइक रिपेयर की दुकानें भी सड़क पर ही बाइक बनाती हैं।
पुलिस लाइन में फुटपाथ पर तिरपाल और लकड़ी से घेरकर 35 दुकानों ने कब्जा कर रखा है। इन 35 के अलावा आठ दुकानें ऐसी हैं, जो लंबे समय से बंद हैं। निगम ने पिछले वर्ष इनपर कार्रवाई भी की, लेकिन अब दोबारा दुकानें सज गई हैं।
आइआइटी आइएसएम के पास सड़क के एक किनारे 16 से अधिक स्ट्रीट फूड वालों ने फुटपाथ पर कब्जा जमा लिया है। एक लाइन से फुटपाथ तो छोड़िए सड़क पर टेबल-कुर्सी लगाकर दुकानदारी करते हैं।
*बहुत जल्द हटाया जाएगा अतिक्रमण : नगर निगम*
सहायक नगर आयुक्त प्रकाश कुमार ने कहा कि नगर निगम के पास अतिक्रमण करने की जानकारी पहुंची है। हाल ही में उपायुक्त की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में भी अतिक्रमण हटाने का निर्देश मिला है। बहुत जल्द फुटपाथ समेत अन्य जगह से अतिक्रमण हटाया जाएगा। स्थाई निर्माण करने वालों पर नगरपालिका अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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