
रिपोर्ट, अरुण कुमार सैनी
केंदुआ(धनबाद) बीसीसीएल कुसुंडा क्षेत्र संख्या 6 के सेवानिवृत्त कर्मचारी हरिपद रवानी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि कंपनी में सेवानिवृत्त के बाद मजदूरों को सहारा के रूप में एकमात्र पेंशन ही प्राप्त होता है इसके अलावा अन्य किसी प्रकार की सुविधा आजीवन उन्हें प्राप्त नहीं होती है। यह दुर्भाग्यपूर्ण विडंबना है की देश के मुखिया इतना सुरक्षा कवच में रहते हैं की रेल हो या हवाई मार्ग दोनों में उन्हें अपने परिवार के साथ फ्री सेवा सुविधा दी गई है एवं कोयला अधिकारियों के सेवानिवृत्त होने के उपरांत उन्हें कई तरह के सुविधा प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की औद्योगिक क्षेत्र कोयला जगत में मजदूर भूगर्भ में जाकर जिंदगी और मौत से खेल कर राष्ट्रहित में कोयला का उत्पादन करते हैं परंतु उन्हें कोई सम्मान नहीं मिलता है। उन्होंने खान दुर्घटना का हवाला देते हुए कहा कि सन 1976 में चास नाला खान दुर्घटना सॉफ्ट माइंस सुदामडीह हरलाडीह सन 1999 बागडी गी खान दुर्घटना टाटा कोलियरी जामाडोबा सन 1995 गजलीटाड इत्यादि खान दुर्घटना में श्रमिकों ने राष्ट्रहित में अपनी बलिदान दिए हैं ऐसा क्या न्याय संगत है कि जिसने कोल इंडिया को भली-भांति अच्छा उत्पादन देकर संवारने का काम किया वैसे मजदूरों को या उनके आश्रितों को या सेवानिवृत्त कर्मियों को मात्र 300, 500, ₹876 या उससे भी कम पेंशन के रूप में मिलेगा। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त होने के बाद कोयला मजदूर अनेक प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं उन्हें दवा और जांच कराने में मिनिमम 6/7 हजार रुपए खर्च होते हैं फल और दूध क्या सही से उन्हें सुखी रोटी भी प्राप्त नहीं होता है। कोल इंडिया छोड़कर भारत सरकार के सभी उपकरणों एवं संस्थानों में पेंशन रिवीजन होता है और उन्हें संतोषजनक रकम पेंशन के रूप में प्रदान होता है। उन्होंने कहा कि कोल इंडिया के अंतर्गत कोयला क्षेत्र में जब तक मजदूर कार्य करते हैं तब तक यूनियन और प्रबंधन मजदूरों से नाता रखती है सेवानिवृत्त होने के पश्चात मजदूरों के बकाया पैसे का भुगतान के लिए ना यूनियन साथ देता है और ना ही प्रबंधन के लोग मजदूरों का कोई दुख दर्द समझते हैं जिससे वैसे मजदूरों को बकाया पैसे लेने में भी उन्हें लोहे का चना चबाने पडते हैं। उन्होंने इस संदर्भ में कोल इंडिया अध्यक्ष, माननीय कोयला मंत्री, प्रधानमंत्री, एवं राष्ट्रपति से आगरा पूर्वक सेवा निवृत्त कर्मियों के उपरोक्त तथ्यों की गहन अध्ययन कर पेंशन राशि का रिवीजन कर उचित राशि की व्यवस्था कराने की मांग की है।

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