
केंदुआ : लोयाबाद बिरेंद्र पासवान ने कहां बच्चों के हाथों में किताब होना चाहिए, सरकारी दफ्तरों का चक्कर नहीं” कोडरमा। सतगावां के राज्य संपोषित प्लस-2 उच्च विद्यालय, बासोडीह के करीब एक हजार छात्र-छात्राओं का अपनी पढ़ाई और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर सड़क पर उतरना बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति है। विद्यार्थियों ने विद्यालय से प्रखंड मुख्यालय तक लगभग तीन किलोमीटर मार्च कर धरना दिया। रिपोर्टों के अनुसार, विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी है और कई महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इस मामले की गम्भीरता को देखते हुए सोशल मीडिया X पर पूर्व प्रदेश सचिव सह प्रवक्ता एवं बाघमारा विधायक प्रतिनिधि बिरेंद्र पासवान ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित संबंधित पदाधिकारियों से कहा कि यह आंदोलन बच्चों का नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का आईना है। जब बोर्ड परीक्षाएं सिर पर हों और विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई के लिए सड़क पर उतरना पड़े, तो शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी से बचने का कोई नैतिक आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों ने पहले अपनी समस्याएं सामने रखीं, लेकिन जब समाधान नहीं हुआ तो उन्हें प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचना पड़ा। यह स्थिति बताती है कि सरकारी कार्यालयों में फाइलें चल रही हैं, लेकिन विद्यालयों में पढ़ाई नहीं चल पा रही है। बिरेंद्र पासवान ने कहा कि सरकार को तत्काल स्पष्ट करना चाहिए कि विद्यालय में विषयवार कितने शिक्षक स्वीकृत हैं, कितने कार्यरत हैं और रिक्त पदों को भरने की समयसीमा क्या है। विद्यार्थियों के अनुसार कक्षा 9-10 और 11-12 के कई महत्वपूर्ण विषयों में शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। विद्यालय में जर्जर छत, जगह और फर्नीचर की कमी जैसी समस्याएं भी सामने आई हैं। उन्होंने कहा, “सरकार यदि बच्चों की आवाज नहीं सुनेगी तो जनता के बीच यह सवाल जरूर जाएगा कि शिक्षा के नाम पर किए जा रहे बड़े-बड़े दावों का जमीनी सच क्या है।”उन्होंने प्रशासन से मांग की कि:
1. विद्यालय में तत्काल विषयवार शिक्षकों की व्यवस्था की जाए।

2. सभी रिक्त शिक्षक पदों को भरने की समयबद्ध कार्ययोजना सार्वजनिक की जाए।

3. विद्यालय की जर्जर छत, कक्षाओं और फर्नीचर की तत्काल जांच और मरम्मत कराई जाए।
4. विद्यार्थियों की बोर्ड परीक्षा की तैयारी प्रभावित न हो, इसके लिए विशेष शैक्षणिक व्यवस्था की जाए।
5. विद्यार्थियों द्वारा पहले दी गई शिकायतों पर हुई कार्रवाई की जवाबदेही तय की जाए।बिरेंद्र पासवान ने चेतावनी दी कि बच्चों की शिक्षा के मुद्दे को केवल आश्वासन देकर टालने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी प्रशासन को कागजी कार्रवाई से आगे बढ़कर जमीन पर परिणाम दिखाना होगा।उन्होंने कहा, “यह किसी दल या व्यक्ति का मुद्दा नहीं है। यह हजारों बच्चों के भविष्य का सवाल है। सरकार को तय करना होगा कि वह बच्चों को शिक्षक और किताब देगी या फिर उन्हें अपनी बुनियादी शिक्षा के लिए आंदोलन करने पर मजबूर करती रहेगी।”
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