• Sat. Feb 21st, 2026

कथा के पूर्व मंदिर प्रांगण में पौधरोपण कर बृजेश जी महाराज ने स्वच्छ पर्यावरण का दिया सन्देश

Admin Office's avatar

ByAdmin Office

Feb 17, 2024

 

 

जब हमारे जन्म जन्मांतर का पूर्ण संचय होता है तभी हमें यह कथा सुनने को मिलतीहै भाग्योदय क्या है मनुष्य का मन कथा में लग जाए यही भाग्योदय है मनुष्य के अंतिम समय में हरि का नाम आ जाए वही जीवन का सlफलय है धर्म बल आत्मा ज्ञान रूप इन पांचो के साथ में दया का होना जरूरी है अगर इन पांचो के साथ में दया नहीं होगी तो यह नष्ट हो जाएंगे निर्बल के बल राम राम के बल में दया थी इसीलिए वह पूजनीय और रावण के बल में दया नहीं थी इसीलिए रावण का पुतला जलाया जाता है राजा परीक्षित इतने भाग्यवान थे कि भगवान ने उन्हें गर्भ में ही दर्शन दे दिए भगवान को भूल जाना ही जीव की सबसे बड़ी विपत्ति है भगवान का जिसमें स्मरण बना रहे हैं वही उसकी सबसे बड़ी संपत्ति है जैसा खाओगे अन्न वैसा होगा मन जब कभी किसी पुरुष की मृत्यु नजदीक आई हो उसे सबसे पहले गृह त्याग करना चाहिए और एकांत में जाकर भगवान का भजन करना चाहिए महाराज श्री जी ने भीष्म पितामह एवं वराह अवतार एवं शिव पार्वती विवाह का संवाद बताया एवं कथा के अंत में शिव पार्वती विवाह की झांकी के दर्शन


There is no ads to display, Please add some
Post Disclaimer

स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *