
नरेश विश्वकर्मा (संवाददाता )
आसनसोल—: प्रेम क्या है, किसी को पाना या खुद को खो देना, एक बंधन या फिर मुक्ति, जीवन या फिर मृत्यु, इसके बारे में सबकी अपनी अपनी राय हैं, लेकिन वास्तव में प्रेम क्या है यह तब मालूम चलता है, जब किसी की जिंदगी मे कोई अचानक से अच्छा लगने लगता है, वो भी उस हद तक जिसकी कोई कल्पना तक नही कर सकता,

वह उसके लिये कब मर मिटने को तैयार हो जाता है वह खुद नही जानता, उसके जीवन मे उसकी प्रेमिका के सिवा और ना तो कुछ दिखाई देता है और ना ही सुनाई देता है, सोते -जागते अगर कुछ दीखता है तो बस वह सक्स जिसे वह अपनी जान से भी ज्यादा प्रेम करता है, यह कब कैसे और किस्से हो जाए यह कोई नही जानता, धर्ती पर बहोत कम ही ऐसे लोग हैं जिनकी प्रेम कहानी सफल हो पाई है, अधिकतर प्रेम कहानियों का अंत बहोत ही बुरा हुआ है, बावजूद उसके प्रेम कम नही हुआ, लगातार प्रेमी और प्रेमिकाओं की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है,

जिसका जीता जागता उदाहरण है फरवरी महीने का वेलेन्टाइन डे विक जिसे प्रेमी प्रेमिकाओं की जोड़ी बहोत ही ख़ुशी के साथ मनाते हैं, लैला-मजनूं, रोमियो-जूलियट और शीरीं-फरहाद जैसे नाम अपनी प्रेम कहानियों के चलते एक मिसाल के तौर पर आज भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं, ये नाम प्यार में कभी एक तो नहीं हुए मगर ये वो नाम हैं जो इश्क-व-जुनून में मर मिटने वाले रूमानियत के फरिश्तों की तरह हमेशा याद किए जाते हैं, इनके सच्चे प्यार के पीछे भी दर्द भरी कहानियां हैं, जिन कहानियों को अब भी प्रेमी जोड़े अमल करते हैं,
कुछ इनके प्रेम कहानियों के तरह ही मिलती जुलती प्रेम कहानी है पश्चिम बंगाल आसनसोल कोर्ट मोड़ के रहने वाले 48 वर्षीय अनुपम घोषाल की जिनको आज से 28 वर्ष पहले महज 18 की उम्र मे उनके पड़ोस की रहने वाली प्रोमिता नाम की एक लड़की से नजर मिली थी कुछ दिनों तक तो दोनों एक दूसरे को बस प्रेम की भावना से देखते रहे फिर उन्होंने इशारों -इशारों बातें शुरू की जिसके बाद वह छुप -छुपकर मिलने लगे एक दूसरे को प्रेम पत्र देकर खुदकी भावनाओं को एक दूसरे को सुनाते रहे, करीब पांच वर्षों तक उनकी प्रेम की कहानी चलती रही दोनों ने इस बिच एक दूसरे के साथ जीने मरने की कसमे खाई,
जीवन के किसी भी मोड़ पर एक दूसरे का साथ नही छोड़ने का वादा किया पर किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था दोनों की प्रेम कहानी अधूरी रह गई किसी कारण अनुपम की प्रेमिका प्रोमिता के पिता कोलकाता चले गए और प्रोमिता भी अपने माता पिता के साथ कोलकाता चली गई, जिसके बाद वह कभी नही मिले प्रोमिता कैसी है कहाँ है किस हाल मे है अनुपम आज तक नही जान पाए उन्होने प्रोमिता को ढूंढने का बहोत प्रयास किया पर वह असफल रहे इस बिच अनुपम अपने जीवन मे तन्हा अकेला हो गए और अपनी प्रेमिका की याद मे करीब 327 फुट लम्बा प्रेम पत्र लिख डाला उस समय उनके पास पैसे नही थे इस लिये उन्होने रोलिंग पेपर पर ही अपनी प्रेम की दर्द भरी कहानी बयां कर डाली जो उन्होंने अपनी प्रेमिका के लिये कुछ गाने भी लिखे हैं,
अपनी प्रेमिका प्रोमिता से बिछड़े अनुपम के 23 वर्ष गुजर गए अनुपम आज भी उसे नही भूल पाए हैं, हर वर्ष वेलेंटाइन डे के दिन अपनी प्रेमिका के लिये लिखे गए प्रेम पत्र को वह देखते हैं पढ़ते हैं अपनी प्रेमिका के साथ बिताए वह प्यार भरे दिन वह पल याद करते हैं, अनुपम कहते हैं, उनके द्वारा उनकी प्रेमिका की याद मे लिखा गया प्रेम पत्र आज के दौर के प्रेमी प्रेमिकाओं के लिये सिख साबित होगी क्योंकी इस प्रेम पत्र मे प्यार मे हारे हुए एक प्रेमी की दर्द भरी दास्ताँ है, वह दास्ताँ जो प्रेम मे हार के बाद भी प्रेमी के दिल मे प्रेम भावना सहन सक्ति सिखाती है, नफरत नही..
आज के दौर मे प्रेम मे धोखा खाने वाले प्रेमी, एक तरफ़ा प्रेम के चक्कर मे आकर प्रेमी अपनी प्रेमिकाओं के ऊपर एसीड अटैक, चाकू और गोली से हमला जैसे अपराध कर बैठते हैं यहाँ तक की कई प्रेमी प्रेम मे हारने के बाद मौत को गले लगा लेते हैं, इस लिये वह अपनी प्रेम पत्र के जरिए प्रेम करने वाले प्रेमी प्रेनिकाओं को यह संदेश देना चाहते हैं की वह प्यार मे धोका खाने के बाद कभी टूटे नही, कभी अपना हिम्मत नही हारें प्यार मे कुछ ऐसा कर जाएं की उनकी प्रेमिका जहाँ भी हो जिस हाल मे हो वह उनके बारे मे जाने तो उसको अफ़सोस आए की उसने उनके जैसे प्रेमी को छोड़कर क्या गलती की,
अनुपम ने कहा उन्होंने अपने परिवार वालों के दबाव मे आकर शादी तो कर ली पर आज भी वह अपनी प्रोमिता को नही भूले प्रोमिता आज भी उनके दिल और दीमाग मे रहती है और वह जबतक जीवित रहेंगे तबतक रहेगी!
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