
*धनबाद :* धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तीज (विशेषकर हरतालिका तीज) मनाने की शुरुआत सबसे पहले माता पार्वती ने जंगल में भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या करके की थी। उनकी सहेली उन्हें उनके पिता की इच्छा के विरुद्ध घने जंगल में ले गई थी, जहाँ उन्होंने रेत से शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की पूजा की थी। तभी से महिलाओं द्वारा अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत रखने की पौराणिक परंपरा चली आ रही है।
हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का यह पर्व मनाया जाता है।

*हरियाली तीज :*

यह सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आती है, जो प्रकृति और हरियाली का स्वागत करती है।
*कजराली (कजली) तीज :*
यह भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है।
*हरतालिका तीज :*
यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है, जिसमें निर्जल व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा की जाती है।
*हरतालिका तीज पर क्यों रखा जाता है व्रत?*
धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था. इसी से हरतालिका तीज के व्रत की परंपरा जुड़ी मानी जाती है. विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना से व्रत रखती हैं. वहीं अविवाहित लड़कियां मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए व्रत करती हैं.
*कैसे करें हरतालिका तीज की पूजा?*
हरतालिका तीज के दिन सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लिया जाता है. इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती कई जगहों पर मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजन करने की परंपरा है.
*क्या हरतालिका तीज का व्रत निर्जला होता है?*
हरतालिका तीज का व्रत कई महिलाएं निर्जला रखती हैं, यानी पूरे दिन अन्न और जल का सेवन नहीं करतीं. हालांकि व्रत रखने की परंपरा परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है. स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर कठोर निर्जला व्रत रखने से बचना चाहिए और अपनी स्थिति के अनुसार निर्णय लेना चाहिए.
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