
आप जब भी भोजन करें तो भोजन करने से जुड़े 5 नियमों का पालन करना न भूलें। कहा जाता है कि ऐसा न करने से मनुष्य को कंगाल होते देर नहीं लगती। आइए जानते हैं कि ये 5 नियम कौन से हैं।

सनातन धर्म में जीवन से जुड़े कई नियमों और परंपराओं के बारे में बताया गया है। आज भी ऐसे कई लोग हैं, जो इन नियमों और परंपराओं का पालन करते हैं। यही वजह है कि इतना समय गुजर जाने के बाद भी आज भी ये नियम अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए हैं। आज भी ये नियम लोगों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। आज हम भोजन करने से जुड़े 5 नियमों के बारे में बताने जा रहे हैं। कहा जाता है कि जो लोग भोजन से जुड़े इन नियमों का पालन नहीं करते हैं, उनसे मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। साथ ही ऐसे लोगों को दरिद्र होने में ज्यादा देर नहीं लगती है। आइए जानते हैं कि वे नियम कौन से हैं।

भोजन की थाली में न धोएं हाथ
शास्त्रों के अनुसार भोजन के बाद कभी भी थाली में हाथ नहीं धोना चाहिए। ऐसा करना शिष्टाचार के खिलाफ माना जाता है। कहा जाता है कि थाली में हाथ धोने पर मां लक्ष्मी और अन्नपूर्णा नाराज हो जाती है। इससे व्यक्ति के बुरे दिन शुरू हो जाते हैं।
एक साथ न दें 3 रोटियां
सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य में 3 अंक को अशुभ माना गया है। कहा जाता है कि भोजन करना भी ऐसा ही शुभ कार्य है। जब भी आप भोजन परोस रहे हों तो उसे एकदम से 3 रोटी न दें बल्कि उसे 2 या 4 रोटी दें। ऐसा करने से भोजन शरीर में लगता है। साथ ही सेहत भी अच्छी रहती है।
थाली में न छोड़ें खाना
सनातन धर्म में भोजन को बर्बाद करना काफी गलत बताया गया है। विद्वानों के अनुसार पेट को जितनी भूख हो, मनुष्य को उतना ही भोजन अपनी थाली में लेना चाहिए। जरूरत से ज्यादा भोजन लेने और बाद में उसे न खाने से भोजन की बर्बादी होती है। इससे अन्न का अनादर होता है। साथ ही मां अन्नपूर्णा नाराज होकर दंड देती हैं।
जमीन पर बैठकर करें भोजन
शास्त्रों के अनुसार मनुष्य को हमेशा जमीन पर बैठकर भोजन करना चाहिए। ऐसा करने से धरती मां की सकारात्मक तरंगे पैरों के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश करती हैं। इससे शरीर सेहतमंद और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर बनता है। इसका असर हमारे जीवन में भी देखने को मिलता है।
भोजन मंत्र का करें उच्चारण
पुराणों के अनुसार जब भी आप भोजन करने बैठें तो सबसे पहले भोजन मंत्र का उच्चारण करें। ऐसा करने से भोजन हमारे शरीर में लगता है और हमारा शरीर स्वस्थ रहता है। जब भी आप भोजन करने बैठें ईश्वर का आभार करना न भूलें।
भोजन मंत्र
ब्रह्मार्पणं ब्रह्महविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्।
ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्म समाधिना।।
ॐ सह नाववतु।
सह नौ भुनक्तु।
सह वीर्यं करवावहै।
तेजस्विनावधीतमस्तु।
मा विद्विषावहै॥
ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति..
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विशेष-प्रदत्त जानकारी व परामर्श शास्त्र सम्मत् दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति मात्र है किसी भी प्रकार का कोई भी प्रयोग किसी विशेषज्ञ से परामर्श लेकर ही करें…
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