दिनाँक :-13/10/2023, शुक्रवार* चतुर्दशी, कृष्ण पक्ष, आश्विन “”””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल) तिथि——— चतुर्दशी 21:50:18 तक पक्ष———————— कृष्ण नक्षत्र——— उoफाo 14:09:40 योग————- ब्रह्म 10:04:01 करण——- विष्टि भद्र 08:54:19 करण———- शकुनी 21:50:18 वार———————– शुक्रवार माह———————- आश्विन चन्द्र राशि—————- कन्या सूर्य राशि—————– कन्या रितु————————– शरद आयन—————– दक्षिणायण संवत्सर—————— शोभकृत संवत्सर (उत्तर) ——————-पिंगल विक्रम संवत—————- 2080 गुजराती संवत————– 2079 शक संवत—————— 1945 कलि संवत—————– 5124 वृन्दावन सूर्योदय————— 06:18:57 सूर्यास्त————— 17:51:38 दिन काल————- 11:32:40 रात्री काल————- 12:27:52 चंद्रास्त————— 17:14:28 चंद्रोदय—————- 29:44:01 लग्न—-कन्या 25°15′ , 175°15′ सूर्य नक्षत्र—————— चित्रा चन्द्र नक्षत्र——— उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र पाया——————- रजत पद, चरण पा—- उत्तरा फाल्गुनी 07:32:51 पी—- उत्तरा फाल्गुनी 14:09:40 पू—- हस्त 20:45:08 ष—- हस्त 27:19:12 ग्रह गोचर ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद ========================== सूर्य= कन्या 25:30, चित्रा 1 पे चन्द्र=कन्या 06:30 , उ o फाo 3 पा बुध =कन्या 20 °:53′ हस्त, 4 ठ शुक्र=सिंह 09°05, मघा ‘ 3 मू मंगल=तुला 06°30 ‘ चित्रा’ 4 री गुरु=मेष 19°30 ‘ भरणी , 2 लू शनि=कुम्भ 06°50 ‘ शतभिषा ,1 गो राहू=(व) मेष 01°00 अश्विनी , 1 चू केतु=(व) तुला 01°00 चित्रा , 3 रा शुभा$शुभ मुहूर्त राहू काल 10:39 – 12:05 अशुभ यम घंटा 14:58 – 16:25 अशुभ गुली काल 07:46 – 09: 12अशुभ अभिजित 11:42 – 12:28 शुभ दूर मुहूर्त 08:37 – 09:24 अशुभ दूर मुहूर्त 12:28 – 13:15 अशुभ वर्ज्यम 23:23 – 25:08* अशुभ चोघडिया, दिन चर 06:19 – 07:46 शुभ लाभ 07:46 – 09:12 शुभ अमृत 09:12 – 10:39 शुभ काल 10:39 – 12:05 अशुभ शुभ 12:05 – 13:32 शुभ रोग 13:32 – 14:58 अशुभ उद्वेग 14:58 – 16:25 अशुभ चर 16:25 – 17:52 शुभ चोघडिया, रात रोग 17:52 – 19:25 अशुभ काल 19:25 – 20:59 अशुभ लाभ 20:59 – 22:32 शुभ उद्वेग 22:32 – 24:06* अशुभ शुभ 24:06* – 25:39* शुभ अमृत 25:39* – 27:13* शुभ चर 27:13* – 28:46* शुभ रोग 28:46* – 30:20* अशुभ होरा, दिन शुक्र 06:19 – 07:17 बुध 07:17 – 08:14 चन्द्र 08:14 – 09:12 शनि 09:12 – 10:10 बृहस्पति 10:10 – 11:08 मंगल 11:08 – 12:05 सूर्य 12:05 – 13:03 शुक्र 13:03 – 14:01 बुध 14:01 – 14:58 चन्द्र 14:58 – 15:56 शनि 15:56 – 16:54 बृहस्पति 16:54 – 17:52 होरा, रात मंगल 17:52 – 18:54 सूर्य 18:54 – 19:56 शुक्र 19:56 – 20:59 बुध 20:59 – 22:01 चन्द्र 22:01 – 23:03 शनि 23:03 – 24:06 बृहस्पति 24:06* – 25:08 मंगल 25:08* – 26:10 सूर्य 26:10* – 27:13 शुक्र 27:13* – 28:15 बुध 28:15* – 29:17 चन्द्र 29:17* – 30:20 उदयलग्न प्रवेशकाल कन्या > 03:36 से 05:48 तक तुला > 05:48 से 08:02 तक वृश्चिक > 08:02 से 10:16 तक धनु > 10:16 से 12:00 तक मकर > 12:00 से 14:10 तक कुम्भ > 14:10 से 15:42 तक मीन > 15:42 से 17:08 तक मेष > 17:08 से 18: 52 तक वृषभ > 18:52 से 20:50 तक मिथुन > 20:50 से 22:58 तक कर्क > 22:58 से 01:20 तक सिंह > 01:20 से 03:20 तक *विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार* (लगभग-वास्तविक समय के समीप) दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट *नोट*– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार । शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥ रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार । अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥ अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें । उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें । शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें । लाभ में व्यापार करें । रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें । काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है । अमृत में सभी शुभ कार्य करें । दिशा शूल ज्ञान————-पश्चिम परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l इस मंत्र का उच्चारण करें-: *शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l* *भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll* अग्नि वास ज्ञान -: *यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,* *चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।* *दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,* *नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्* *नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।* 15 + 14 + 6 + 1 = 36 ÷ 4 = 0 शेष स्वर्ग लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l ग्रह मुख आहुति ज्ञान सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है केतु ग्रह मुखहुति शिव वास एवं फल -: 29 + 29 + 5 = 63 ÷ 7 = 0 शेष शमशान वास = मृत्यु कारक भद्रा वास एवं फल – *स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।* *मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।* प्रातः 08:52 तक समाप्त पाताल लोक = धन लाभ कारक विशेष जानकारी *चतुर्दशी श्राद्ध *अपमृत्यु श्राद्ध शुभ विचार उद्योगे नास्ति दारिद्र्य जपतो नास्ति पातकम् । मौनेनकलहोनास्ति नास्ति जागरितो भयम् ।। ।। चा o नी o।। जो उद्यमशील हैं, वे गरीब नहीं हो सकते, जो हरदम भगवान को याद करते है उनहे पाप नहीं छू सकता. जो मौन रहते है वो झगड़ों मे नहीं पड़ते. जो जागृत रहते है वो िनभरय होते है. सुभाषितानि गीता -: अर्जुनविषाद योग अo-01 स घोषो धार्तराष्ट्राणां हृदयानि व्यदारयत् । नभश्च पृथिवीं चैव तुमुलो व्यनुनादयन् ॥, और उस भयानक शब्द ने आकाश और पृथ्वी को भी गुंजाते हुए धार्तराष्ट्रों के अर्थात आपके पक्षवालों के हृदय विदीर्ण कर दिए॥,19॥, There is no ads to display, Please add someAdmin OfficeLike this:Like Loading... 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