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आईआईटी (आईएसएम) धनबाद और सीएचटी के बीच ऊर्जा क्षेत्र में रिसर्च और पीएचडी फेलोशिप को लेकर समझौता

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Nov 3, 2026
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पांच साल की पार्टनरशिप के तहत एक समय में 10 रिसर्च स्कॉलर्स को मिलेगी बढ़ी हुई फेलोशिप, इंडस्ट्री की जरूरतों पर आधारित रिसर्च को मिलेगा बढ़ावा_

 

रिपोर्ट,अरुण कुमार सैनी

केंदुआ(धनबाद)आईआईटी (आईएसएम) धनबाद ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत काम करने वाले सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी (सीएचटी) के साथ पांच साल का मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) किया है। इस पार्टनरशिप का मकसद ऊर्जा क्षेत्र में पीएचडी रिसर्च को बढ़ावा देना, इंडस्ट्री और एकेडमिक संस्थानों के बीच सहयोग मजबूत करना और नई तकनीकों के विकास को गति देना है।

इस एमओयू पर हाल ही में गोवा में आयोजित 29वें एनर्जी टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन मीट (ईटीएम-2026) के दौरान सीएचटी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर शंकर गुणशेखरन और आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के डीन (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) प्रो. पार्थसारथी दास ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल, ज्वाइंट सेक्रेटरी (गैस) एवं चीफ विजिलेंस ऑफिसर आलोक त्रिपाठी तथा आईआईटी (आईएसएम) के एसोसिएट डीन (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) प्रो. एजाज अहमद मौजूद थे। इस पार्टनरशिप पर प्रो. पार्थसारथी दास ने कहा, “इस सहयोग से इंडस्ट्री की जरूरतों के मुताबिक पीएचडी रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा और हमारे रिसर्च स्कॉलर्स को ऊर्जा क्षेत्र की चुनौतियों के लिए स्वदेशी तकनीक विकसित करने का अवसर मिलेगा।” ईटीएम-2026 का उद्घाटन केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने किया। इस साल मीट की थीम ‘एक्सेलरेटिंग एनर्जी इनोवेशन: फ्रॉम रिसर्च टू कमर्शियलाइजेशन’ थी, जिसमें रिसर्च को व्यावहारिक तकनीक और व्यावसायिक इस्तेमाल तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। समझौते के तहत सीएचटी–आईआईटी (आईएसएम) धनबाद रिसर्च फेलोशिप प्रोग्राम शुरू किया जाएगा। इसके तहत एक समय में अधिकतम 10 पीएचडी स्कॉलर्स को फेलोशिप दी जाएगी। चयनित स्कॉलर्स को लागू सीएसआईआर/यूजीसी दरों से 25 प्रतिशत अधिक फेलोशिप मिलेगी। सीनियर रिसर्च फेलोशिप के स्तर पर यह राशि 52,500 रुपये प्रति माह होगी। इसके अलावा नियमानुसार हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए),हर साल 20,000 रुपये का कंटिजेंसी ग्रांट और रिसर्च में इस्तेमाल होने वाली जरूरी सामग्री के लिए भी सहायता मिलेगी। फेलोशिप चार साल के लिए होगी,जिसे सीएचटी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर की मंजूरी से एक साल और बढ़ाया जा सकेगा इस पार्टनरशिप के तहत ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रोलाइजर, फ्यूल सेल, एडवांस्ड बैटरी, एनर्जी स्टोरेज, कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (सीसीयूएस), कार्बन डाइऑक्साइड से केमिकल बनाने, कैटेलिस्ट,पेट्रोकेमिकल्स, क्लीनर फ्यूल, कोयला एवं बायोमास गैसीफिकेशन,वेस्ट मैनेजमेंट, जल संरक्षण और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में रिसर्च होगी। इसके अलावा ज्वाइंट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, टेस्टिंग फैसिलिटी, स्पॉन्सर्ड रिसर्च और इंडस्ट्री से जुड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम भी शुरू करने की योजना है। फैकल्टी को इंडस्ट्री में काम करने और विशेषज्ञों के साथ जुड़ने के अवसर मिलेंगे। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर नीतिगत सुझाव देने के लिए एक एनर्जी थिंक टैंक बनाने की भी योजना है समझौते में रिसर्च के दौरान विकसित तकनीकों के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (आईपीआर) की सुरक्षा और उनके व्यावसायिक इस्तेमाल का भी प्रावधान है। इसके तहत रिसर्च के आधार पर स्टार्टअप शुरू करने को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इस सहयोग से एकेडमिक रिसर्च को इंडस्ट्री की जरूरतों से जोड़ने और देश में ऊर्जा क्षेत्र की स्वदेशी तकनीकों को विकसित करने में मदद मिलेगी।


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