

अल-इकरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, बरियो, गोविंदपुर में सत्र 2026-28 के नवप्रवेशित प्रशिक्षु-शिक्षकों के स्वागत एवं शैक्षणिक अभिमुखीकरण के उद्देश्य से भव्य इंडक्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, अनुशासन, व्यक्तित्व विकास और शिक्षक-प्रशिक्षण के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम का वातावरण आत्मीयता, उत्साह, गरिमा और शैक्षणिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. मो. शमीम अहमद, सचिव डॉ. एस. खालिद, अध्यक्ष सुरैया खानम, संकाय अध्यक्ष प्रो. डॉ. निखत परवीन, इंजीनियर परवेज खालिद सहित महाविद्यालय के समस्त शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी उपस्थित रहे। इसके अलावा सत्र 2026-28 के सभी नवप्रवेशित प्रशिक्षु-शिक्षक तथा सत्र 2025-27 के सभी विद्यार्थी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. तनवीर यूनुस, H.O.D., शिक्षा विभाग, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग थे। विशेषतः एलुमिनी के रूप में अल-इकरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज के पूर्व छात्र, वर्तमान में धनबाद टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, निरसा के प्राचार्य डॉ. फिरदौस उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत B.Ed. प्रशिक्षु-शिक्षकों द्वारा स्वागत गीत के माध्यम से अतिथियों, महाविद्यालय के पदाधिकारियों, शिक्षकों तथा नवप्रवेशित विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया गया।
इसके बाद 2026-28 सत्र के नवप्रवेशित प्रशिक्षु-शिक्षकों का परिचय सत्र आयोजित हुआ। नए विद्यार्थियों ने अपने शैक्षणिक एवं व्यक्तिगत परिचय साझा किए। परिचय सत्र के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि अनेक प्रशिक्षु-शिक्षक देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों, जैसे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय तथा दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। इससे कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के बीच विशेष उत्साह देखने को मिला। परिचय सत्र का उद्देश्य केवल औपचारिक परिचय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने विभिन्न शैक्षणिक एवं सामाजिक पृष्ठभूमि से आए विद्यार्थियों के बीच संवाद और आपसी परिचय की एक नई शुरुआत की।
कार्यक्रम में मंचासीन अतिथियों, पदाधिकारियों एवं गणमान्य व्यक्तियों का परिचय डॉ. अनवर फातिमा द्वारा कराया गया। उन्होंने उपस्थित अतिथियों के शैक्षणिक अनुभव, उपलब्धियों और महाविद्यालय से उनके जुड़ाव के बारे में प्रशिक्षु-शिक्षकों को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अनुभवी शिक्षकों एवं शिक्षाविदों के अनुभव से सीखना शिक्षक-प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों की विविध शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने प्रशिक्षु-शिक्षकों को प्रेरणा प्रदान की।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. मो. शमीम अहमद ने अपने संबोधन में 2026-28 सत्र के सभी नवप्रवेशित प्रशिक्षु-शिक्षकों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में प्रवेश के साथ ही विद्यार्थियों की एक नई शैक्षणिक एवं व्यावसायिक यात्रा शुरू हुई है। उन्होंने महाविद्यालय की शैक्षणिक परंपरा, अनुशासन, शिक्षण-पद्धति, प्रशिक्षण की कार्यप्रणाली एवं विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्रशिक्षु-शिक्षकों से कहा कि B.Ed. के दो वर्ष केवल परीक्षा और डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि इन दो वर्षों में उन्हें अपने व्यक्तित्व, शिक्षण कौशल, संप्रेषण क्षमता, नेतृत्व क्षमता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व को विकसित करना चाहिए। प्राचार्य ने विद्यार्थियों को महाविद्यालय के सभी शिक्षकों के मार्गदर्शन का लाभ उठाने और नियमित अध्ययन के साथ-साथ विभिन्न शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने की सलाह दी। उन्होंने नए प्रशिक्षु-शिक्षकों से अपेक्षा व्यक्त की कि वे महाविद्यालय की इस शैक्षणिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे।
महाविद्यालय के सचिव डॉ. एस. खालिद ने अपने संबोधन में अल-इकरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज की स्थापना और विकास यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 2000 में हुई थी और यह झारखंड के प्रारंभिक निजी B.Ed. महाविद्यालयों में से एक है। उन्होंने संस्था की स्थापना के उद्देश्यों, शैक्षणिक विकास, उपलब्ध पाठ्यक्रमों एवं विद्यार्थियों को प्रदान की जाने वाली सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था की वास्तविक पहचान उसकी शैक्षणिक उपलब्धियों और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में उसकी भूमिका से होती है। सचिव ने विद्यार्थियों से महाविद्यालय के संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने और अपने प्रशिक्षण काल को सार्थक बनाने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि डॉ. तनवीर यूनुस, H.O.D., शिक्षा विभाग, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग ने अपने संबोधन में शिक्षक-प्रशिक्षण की व्यापक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षक बनना केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य को दिशा देने की जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रशिक्षु-शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक-प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को अपने विषयगत ज्ञान के साथ-साथ मानवीय मूल्यों, संवेदनशीलता, अनुशासन, तार्किक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक का प्रभाव केवल कक्षा की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहता। शिक्षक अपने विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और दृष्टिकोण को प्रभावित करता है और इस प्रकार समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डॉ. तनवीर यूनुस ने प्रशिक्षु-शिक्षकों को महाविद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक अवसरों का भरपूर लाभ उठाने, नियमित अध्ययन करने और अपने ज्ञान को निरंतर अद्यतन करते रहने की सलाह दी। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को सीखने की प्रक्रिया को जीवनपर्यंत जारी रखने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में इंजीनियर परवेज खालिद ने भी प्रशिक्षु-शिक्षकों को संबोधित किया। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को नए शैक्षणिक सत्र के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रशिक्षण के दो वर्षों को पूरी गंभीरता, लगन और सकारात्मक सोच के साथ पूरा करना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. ममता कुमारी सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि डॉ. तनवीर यूनुस, महाविद्यालय के अध्यक्ष, सचिव, प्राचार्य, संकाय अध्यक्ष, इंजीनियर परवेज खालिद, सभी शिक्षकों, शिक्षकेतर कर्मचारियों तथा सत्र 2026-28 एवं 2025-27 के सभी विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में 2026-28 सत्र के नवप्रवेशित प्रशिक्षु-शिक्षकों के बीच लाइब्रेरी कार्ड एवं पाठ्यक्रम (Syllabus) का वितरण किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को महाविद्यालय की पुस्तकालय सुविधा और शैक्षणिक संसाधनों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय परिसर में उत्साह, अनुशासन, आत्मीयता और शैक्षणिक वातावरण देखने को मिला। एक ओर जहां नए प्रशिक्षु-शिक्षकों में अपने नए शैक्षणिक जीवन को लेकर उत्साह था, वहीं सत्र 2025-27 के विद्यार्थियों की उपस्थिति ने नए विद्यार्थियों के लिए वरिष्ठ सहपाठियों से संवाद और अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान किया।
इंडक्शन कार्यक्रम ने नवप्रवेशित प्रशिक्षु-शिक्षकों के लिए महाविद्यालय में उनकी दो वर्षीय प्रशिक्षण यात्रा की औपचारिक और प्रेरणादायक शुरुआत की। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि शिक्षक-प्रशिक्षण केवल एक डिग्री हासिल करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुशासन, व्यक्तित्व, कौशल और सामाजिक जिम्मेदारी के विकास की यात्रा है। अंततः अल-इकरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज परिवार ने सभी नवप्रवेशित प्रशिक्षु-शिक्षकों का स्वागत करते हुए उनके उज्ज्वल शैक्षणिक, व्यावसायिक एवं सामाजिक भविष्य की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम ने नए विद्यार्थियों के मन में संस्थान के प्रति अपनापन और अपने भविष्य के प्रति नई ऊर्जा एवं संकल्प का संचार किया।
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